समाज में बरसों से पनप रहे उंच-नीच और भेदभाव की भावना को बखूभी दर्शाती है संजय मिश्र की ये फिल्म

अच्छी कहानियों के माध्यम से सिनेमा ने हमेशा लोगों को प्रेरित किया है। इस सप्ताह रिलीज हुई फिल्म कोट एक ऐसा ही सिनेमा है जो दर्शकों को प्रोत्साहित करता है, प्रेरित करता है, उन्हें इमोशनल करता है और समाज के कुछ कड़वे सच को प्रभावी रूप से दर्शाता है।
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कोट मूवी (Photo Credits: File Photo)
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फिल्म: कोट

कास्ट: संजय मिश्रा, विवान शाह, पूजा पांडे, सोनल झा, हर्षित पाण्डेय, गगन गुप्ता

निर्देशक: अक्षय दीत्ति

निर्माता; कुमार अभिषेक, पन्नू सिंह, अर्पित गर्ग और शिव आर्यन

रनटाइम: 2 घंटा 3 मिनट

रेटिंग: 3 स्टार्स

कहानी: फिल्म की कहानी बिहार के एक गांव के बेहद गरीब, नीची जाति के माधव की है। उसके घरवालों को गांव में शादी में तो नहीं बुलाया जाता मगर किसी के मरने पर जो खाना खिलाया जाता है उसमें उसके परिवार को बुलाया जाता है। एक बार जब वह ऐसे ही एक भोज में अपनी भूख मिटा रहा था तो उसने एक अमीर आदमी को कोट पहने देख लिया और तभी से उसके मन मस्तिष्क में यह ख्याल आने लगा ‘उस बाबू साहब जैसा मुझे भी एक कोट पहनना है।‘माधव समय फैसला करता है खुद का बिजनस करने का। इस बीच माधव और साक्षी की एकतरफा प्रेम कहानी भी चलती रहती है। माधव साक्षी से एकतरफा प्यार करता है लेकिन उसका दिल उस समय टूट जाता है जब उसकी शादी एक नौकरी वाले लड़के से हो रही होती है। वह बारात में जाकर नागिन डांस करने लगता है और कहता है कि अगर हम छोटी जाति के न होते तो आज वह मेरी होती।

अभिनय: फिल्म में अभिनेता संजय मिश्रा ने लाजवाब और बेमिसाल अभिनय किया है। नए फिल्म मेकर्स के साथ भी वह अपनी अदाकारी के जौहर को बेहतरीन ढंग से दिखाते हैं। अभिनेता विवान शाह वास्तव में प्रशंसा और पुरुस्कार के हकदार हैं। मुंबई जैसे मेट्रो शहर में पलने बढ़ने वाले विवान के लिए बिहार के गांव के इस चरित्र को निभाना बहुत ही चुनौतिपूर्ण था लेकिन वह पूरी तरह अपने किरदार के रंग में रंगे हुए नज़र आए। उन्होंने स्थानीय संवाद के उच्चारण में और अदायगी में अपना सौ प्रतिशत दिया है। पूजा पाण्डेय ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज करवाई है।

म्यूजिक: फिल्म कोट का बैकग्राउंड म्युज़िक बहुत ही अच्छा है। सीन की मांग के अनुसार अद्भुत बैकग्राउंड स्कोर सजाया गया है जो दृश्यों को अधिक बेहतर बनाता है।

फाइनल टेक: अक्षय दीत्ति का डायरेक्शन कमाल का है। उन्होंने हर सीन को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है। कोट देखने वाला सिनेमा है, सीखने वाला सिनेमा है। देश के छोटे से गांव के गरीब माधव ने किसी को कोट पहने देखा और प्रेरित हुआ। उसने कारोबार शुरू किया और सफलता का परचम लहराया। वह युवाओं की प्ररणा बन गया, हर तरफ उसकी चर्चा होने लगी। उसने गांव में निःशुल्क स्कूल खोला और पढ़ेगा इंडिया तभी बढ़ेगा इंडिया के नारे को बुलंदी दी। विवान शाह, संजय मिश्रा की मास्टर एक्टिंग और एक प्रेरित करने वाली कहानी की वजह से फिल्म ‘कोट’ आपको मिस नहीं करनी चाहिए।

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