Nadira Babbar Birthday: राज बब्बर के अफेयर ने बदली नादिरा बब्बर की जिंदगी, थिएटर बना सहारा

Nadira Babbar Struggle: राज बब्बर के अफेयर ने नादिरा बब्बर की निजी जिंदगी को झकझोर दिया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। नादिरा ने खुद को संभाला और आत्मसम्मान व मजबूती की मिसाल कायम की।
Raj Babbar's affair changed Nadira Babbar life, theatre became her refuge
नादिरा बब्बर (फोटो क्रेडिट-सोशल मीडिया)
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Nadira Babbar Life Story: हिंदी सिनेमा और थिएटर की जानी-मानी अभिनेत्री नादिरा बब्बर की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही। प्यार, संघर्ष, धोखा और फिर खुद को संभालकर आगे बढ़ने का उनका सफर आज भी कई महिलाओं के लिए प्रेरणा है। 20 जनवरी 1948 को मुंबई में जन्मी नादिरा जहीर, आज अपने 78वें जन्मदिन की तैयारी कर रही हैं। इस खास मौके पर उनकी जिंदगी की वह कहानी फिर चर्चा में है, जब पति के अफेयर ने उनकी दुनिया हिला दी थी।

नादिरा को बचपन से ही रंगमंच और अभिनय से गहरा लगाव था। उन्होंने अभिनय की बारीकियां नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) से सीखीं। यही वह जगह थी, जहां उनकी मुलाकात अभिनेता राज बब्बर से हुई। एक नाटक के दौरान दोनों करीब आए और यह दोस्ती जल्द ही प्यार में बदल गई। साल 1975 में नादिरा ने संघर्ष कर रहे राज बब्बर से शादी कर ली। उस वक्त राज के पास न तो बड़ा नाम था और न ही स्थिर करियर, लेकिन नादिरा ने उन पर पूरा भरोसा दिखाया।

नादिरा बब्बर की निजी जिंदगी

शादी के बाद दोनों दिल्ली में रहने लगे, जहां उनकी बेटी जूही बब्बर का जन्म हुआ। बढ़ते खर्च और बेहतर भविष्य की तलाश में राज बब्बर मुंबई चले गए। मुंबई में राज बब्बर का करियर तेजी से आगे बढ़ा और फिल्मों में उन्हें पहचान मिलने लगी। इसी दौरान उनके और नादिरा के बेटे आर्य बब्बर का जन्म हुआ। बाहर से सब कुछ ठीक लग रहा था, लेकिन नादिरा की जिंदगी में मुश्किलें यहीं से शुरू हुईं।

राज बब्बर ने कबूला अफेयर की बात

साल 1982 में राज बब्बर ने फिल्म ‘भीगी पलके’ में अभिनेत्री स्मिता पाटिल के साथ काम किया। शूटिंग के दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और यह रिश्ता अफेयर में बदल गया। जब इस बात की चर्चा हर तरफ होने लगी, तो राज बब्बर ने नादिरा के सामने अपने रिश्ते को सरेआम कबूल कर लिया। यह सच नादिरा के लिए किसी गहरे सदमे से कम नहीं था।

धोखे के बाद भी नहीं हारीं नादिरा बब्बर

पति के धोखे ने नादिरा को तोड़ जरूर दिया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने खुद को अपने बच्चों जूही और आर्य के साथ-साथ थिएटर के काम में झोंक दिया। अभिनय और रंगमंच उनके लिए सहारा बन गए। बाद में जब बीमारी के चलते स्मिता पाटिल का निधन हो गया, तो नादिरा ने टूट चुके राज बब्बर को भी संभाला।

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