Oscar Real Name 2026: क्यों नहीं बेच सकते विजेता अपनी ऑस्कर ट्रॉफी? जानें क्या है इसका सख्त नियम

Oscar 2026 Ceremony: दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म पुरस्कार अकादमी अवार्ड्स का आधिकारिक नाम अकादमी अवार्ड ऑफ मेरिट है। खास नियम के तहत 1951 के बाद के विजेता अपनी ऑस्कर ट्रॉफी बेच नहीं सकते।
Oscar Real Name Academy Award of Merit Oscar trophy rules why Oscar winners cannot sell trophy
ऑस्कर ट्रॉफी (फोटो- सोशल मीडिया)
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Oscar Winners Cannot Sell Trophy: दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म पुरस्कारों में से एक अकादमी अवार्ड्स का 98वां समारोह आज अमेरिका के लॉस एंजेलिस में आयोजित हो रहा है। इस भव्य कार्यक्रम में साल 2025 में रिलीज हुई फिल्मों, अभिनेताओं, निर्देशकों और तकनीकी कलाकारों को उनके बेहतरीन काम के लिए सम्मानित किया जाएगा।

यह समारोह लॉस एंजेलिस के प्रसिद्ध डॉल्बी थिएटर में आयोजित हो रहा है और दुनियाभर के फिल्म प्रेमी इसे देखने के लिए उत्साहित हैं। भारत में भी दर्शक इस समारोह का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। अमेरिका में यह अवॉर्ड शो 15 मार्च की शाम 7 बजे ईस्टर्न टाइम से शुरू होगा। भारतीय समय के अनुसार यह समारोह 16 मार्च की सुबह 4:30 बजे से लाइव देखा जा सकेगा।

भारत में कब और कहां देखें ऑस्कर

भारत में दर्शक इसे जियोहॉटस्टार ऐप और वेबसाइट पर लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए देख सकते हैं। इसके अलावा स्टार मूवीज पर भी सुबह 4:30 बजे से इसका सीधा प्रसारण किया जाएगा। अगर दर्शक लाइव नहीं देख पाते हैं, तो बाद में इसे जियोहॉटस्टार पर ऑन-डिमांड देखा जा सकता है, जबकि स्टार मूवीज पर शाम 9 बजे इसका रिपीट टेलीकास्ट भी प्रसारित होगा।

ऑस्कर नहीं, यह है असली नाम

दुनियाभर में इस अवॉर्ड को आमतौर पर ‘ऑस्कर’ कहा जाता है, लेकिन इसका आधिकारिक नाम अकादमी अवार्ड ऑफ मेरिट है। हालांकि ‘ऑस्कर’ नाम इतना लोकप्रिय हो चुका है कि अब लोग इस पुरस्कार को इसी नाम से पहचानते हैं। समय के साथ यह शब्द फिल्म पुरस्कारों का पर्याय बन गया है। ‘ऑस्कर’ नाम के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है।

ऑस्कर की कहानी

साल 1930 के दशक में एकेडमी की लाइब्रेरियन मार्गरेट हेरिक ने पहली बार इस प्रतिमा को देखकर मजाक में कहा था कि यह उनके चाचा ऑस्कर जैसी दिखती है। इसके बाद यह नाम धीरे-धीरे लोकप्रिय होता गया। 1934 में अखबारों में इस नाम का इस्तेमाल होने लगा और आखिरकार 1939 में एकेडमी ने ‘ऑस्कर’ नाम को आधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया।

विजेता क्यों नहीं बेच सकते प्रतिमा

ऑस्कर से जुड़ा एक बेहद खास नियम भी है। साल 1951 के बाद से यह नियम लागू किया गया कि कोई भी विजेता अपनी ऑस्कर प्रतिमा को सीधे बेच नहीं सकता। अगर कोई विजेता या उनके परिवार वाले इस प्रतिमा को बेचना चाहते हैं, तो उन्हें पहले इसे अकादमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंस को सिर्फ 1 डॉलर में वापस खरीदने का प्रस्ताव देना होगा। यह नियम इसलिए बनाया गया ताकि इस प्रतिष्ठित पुरस्कार की गरिमा बनी रहे और यह किसी व्यापारिक वस्तु में न बदल जाए।

कैसी होती है ऑस्कर प्रतिमा

ऑस्कर की प्रतिमा भी अपने आप में बेहद खास होती है। यह लगभग 13.5 इंच (करीब 34 सेंटीमीटर) ऊंची और करीब 8.5 पाउंड (लगभग 3.85 किलोग्राम) वजन की होती है। यह कांसे यानी ब्रॉन्ज से बनाई जाती है और उस पर 24 कैरेट सोने की परत चढ़ाई जाती है। यही वजह है कि यह प्रतिमा देखने में बेहद चमकदार और आकर्षक लगती है। सिनेमा की दुनिया में ऑस्कर जीतना किसी भी कलाकार के लिए सबसे बड़ा सम्मान माना जाता है।