अभिनय से राजनीति तक हर क्षेत्र में चमके N T Rama Rao, मुख्यमंत्री बनकर भी जीता लोगों का दिल

Nandamuri Taraka Rama Rao Career: एनटीआर ने अपने करियर में 17 बार भगवान कृष्ण का किरदार निभाया और करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र बन गए। फिल्मों से राजनीति तक, उन्होंने हर क्षेत्र में अपनी छाप छोड़ी।
Nandamuri Taraka Rama Rao Birth Anniversary Lord Krishna Role
नंदमुरी तारक रामा राव (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
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Nandamuri Taraka Rama Rao Birth Anniversary: साउथ सिनेमा के एक्टर नंदमुरी तारक रामा राव का जन्म 28 मई 1923 को आंध्र प्रदेश के छोटे से गांव निम्माकारू में हुआ था। एनटीआर ने सिर्फ फिल्मों में अभिनय नहीं किया, बल्कि अपने पौराणिक किरदारों के जरिए करोड़ों लोगों की आस्था भी जीत ली। खासकर भगवान कृष्ण के रूप में उनकी छवि इतनी लोकप्रिय हुई कि लोग उन्हें सचमुच भगवान का स्वरूप मानने लगे थे।

साधारण किसान परिवार से आने वाले एनटीआर ने बचपन में काफी संघर्ष देखा। पढ़ाई के दौरान वह परिवार की मदद के लिए दूध बेचने का काम भी करते थे। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें सरकारी नौकरी मिली, लेकिन अभिनय के प्रति उनका जुनून उन्हें फिल्मों की दुनिया में ले आया। उन्होंने साल 1949 में फिल्म माना देसम से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की।

भगवान कृष्ण के किरदार ने दिलाई पहचान

शुरुआत में सामाजिक और ड्रामा फिल्मों में काम करने के बाद एनटीआर ने पौराणिक फिल्मों की ओर रुख किया और वहीं से उनकी लोकप्रियता आसमान छूने लगी। एनटीआर ने ने अपने करियर में 17 बार भगवान कृष्ण का किरदार निभाया। इसके अलावा उन्होंने भगवान राम, भगवान शिव और भगवान विष्णु के रोल भी निभाए। पर्दे पर उनका शांत चेहरा, मुस्कान और संवाद बोलने का अंदाज लोगों को मंत्रमुग्ध कर देता था।

सिनेमा से राजनीति तक का शानदार सफर

पौराणिक फिल्मों के अलावा एनटीआर ने मायाबाजार, मल्लीश्वरी और नर्तनशाला जैसी कई यादगार फिल्मों में काम किया। उनकी फिल्म पाताल भैरवी पहली दक्षिण भारतीय फिल्म बनी, जिसे इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया में दिखाया गया था। फिल्मों में सफलता के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और साल 1982 में तेलुगु देसम पार्टी की स्थापना की। कुछ ही महीनों में उनकी पार्टी सत्ता में आ गई और वह आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।

आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं एनटीआर

एनटीआर को उनके योगदान के लिए पद्मश्री और कई राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। 18 जनवरी 1996 को हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया, लेकिन आज भी वह भारतीय सिनेमा और लोगों की यादों में अमर हैं।

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