Manoj Tiwari Birthday: जब दर्द पर भारी पड़ा जुनून, जगराते में घायल होकर भी गाते रहे मनोज तिवारी

Manoj Tiwari Struggle Story: भोजपुरी सुपरस्टार मनोज तिवारी के संघर्ष की कहानी प्रेरणादायक है। जगराते में सिर में गंभीर चोट लगने के बावजूद उन्होंने गाना नहीं छोड़ा। आज वह लाखों लोगों के लिए मिसाल हैं।
Bhojpuri Singer and BJP leader Manoj Tiwari birthday Special struggle story
मनोज तिवारी (फोटो- सोशल मीडिया)
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Manoj Tiwari Inspirational Story: भोजपुरी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता, गायक और राजनेता मनोज तिवारी आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। 1 फरवरी 1971 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में जन्मे मनोज तिवारी आज 55 साल के हो चुके हैं। फिल्मों और संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने के साथ-साथ उन्होंने राजनीति में भी मजबूत जगह बनाई है। आज वह भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने के पीछे उन्होंने काफी मेहनत किया।

मनोज तिवारी ने अपने करियर की शुरुआत एक गायक के तौर पर की थी। शुरुआती दिनों में वह जगरातों और धार्मिक कार्यक्रमों में भजन गाया करते थे। शीतला घाट और अर्दली बाजार स्थित महावीर मंदिर उनके संघर्ष की सबसे बड़ी गवाही देते हैं। कहा जाता है कि एक बार महावीर मंदिर में सावन और नागपंचमी के मौके पर आयोजित जगराते में प्रस्तुति देते वक्त उनके सिर में गंभीर चोट लग गई थी। गाना गाते-गाते उनके सिर से खून बहने लगा, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने मंच नहीं छोड़ा और पूरी श्रद्धा के साथ गाते रहे।

मनोज तिवारी का करियर

1990 के दशक की शुरुआत में मनोज तिवारी को छोटे-छोटे कार्यक्रमों में गाने के मौके मिलने लगे। साल 1991 में उन्होंने पहली बार गंगा आरती के दौरान प्रस्तुति दी, हालांकि उस समय उन्हें कोई बड़ा मंच नहीं मिला था। धीरे-धीरे मेहनत रंग लाई और 1995 तक उनके भक्ति गीत लोगों की जुबान पर चढ़ने लगे। उनकी किस्मत तब बदली जब भक्ति एल्बम ‘शीतला घाट पे काशी’ का गीत ‘बाड़ी शेर पर सवार’ रिलीज हुआ। इस गीत ने जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की और मनोज तिवारी भोजपुरी संगीत का जाना-पहचाना चेहरा बन गए।

भोजपुरी इंडस्ट्री के बने सुपरस्टार

इसके बाद उन्होंने भोजपुरी सिनेमा में एंट्री की और देखते ही देखते इंडस्ट्री के सुपरस्टार बन गए। फिल्मों में सफलता के बाद उन्होंने राजनीति का रुख किया और वहां भी अपनी मेहनत और लोकप्रियता के दम पर खास पहचान बनाई। आज भी मनोज तिवारी शीतला घाट को अपने जीवन का अहम मोड़ मानते हैं। वह अक्सर वाराणसी आते हैं और वहां होने वाले आयोजनों में शामिल होकर अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हैं। सिर से खून बहते हुए भी मंच न छोड़ने वाला यह कलाकार आज लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है।

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