कंगना रनौत ने संसद में 'वंदे मातरम' पर की खुलकर बात, PM मोदी की तारीफ कर कांग्रेस पर साधा निशाना

Vande Mataram Parliament Debate: कंगना रनौत ने संसद में 'वंदे मातरम' पर चर्चा को लेकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की और कांग्रेस पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाया।
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कंगना रनौत (फोटो-सोर्स,सोशल मीडिया)
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Kangana Ranaut Vande Mataram Statement: बॉलीवुड अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत ने हाल ही में संसद में 'वंदे मातरम' को लेकर चल रही बहस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। कंगना ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस गीत के इतिहास और महत्व को संक्षेप में साझा किया, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे स्वतंत्रता संग्राम के समय इस गीत ने विरोध की बुझती हुई लौ को फिर से प्रज्वलित किया और ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ एक चुनौतीपूर्ण संदेश दिया।

कंगना ने अपने बयान में कहा, “एक कलाकार के तौर पर मुझे गर्व है कि संसद में इस गीत, कविता और कलाकृति पर दस घंटे तक चर्चा हो रही है। यह गीत आज राष्ट्रवादी चेतना की नींव के रूप में खड़ा है और इसकी यात्रा सदियों तक फैली हुई है।”

कंगना रनौत ने की प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ

इसके साथ ही कंगना ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा भारतीय कला और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि किस तरह प्रधानमंत्री की नीतियों ने महिलाओं के गौरव और अस्तित्व को आगे बढ़ाया है। कंगना ने कांग्रेस पर भी तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि 2014 में जब भारत ने अमृत काल की शुरुआत की, उस समय अर्थव्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती थी। कांग्रेस ने महिलाओं के आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाई और देश के विकास को पीछे धकेल दिया। कंगना ने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनके काम और पहनावे पर भी सवाल उठाए गए। उन्होंने मध्य प्रदेश की महिलाओं को लेकर कांग्रेस द्वारा की गई अपमानजनक टिप्पणियों का भी जिक्र किया।

'वंदे मातरम' को लेकर कही ये बात

कंगना ने कहा कि 'वंदे मातरम' में मां दुर्गा का वर्णन है, लेकिन कांग्रेस ने इस पर भी आपत्ति जताई। यह दिखाता है कि महिला विरोधी सोच कांग्रेस के डीएनए में रही है। इतिहास की बात करें तो 'वंदे मातरम' बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1870 के दशक में लिखा था और यह उनके उपन्यास 'आनंदमठ' में प्रकाशित हुआ। रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे संगीतबद्ध किया और 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सत्र में पहली बार प्रस्तुत किया गया।

इसके बाद यह गीत स्वतंत्रता संग्राम और स्वदेशी आंदोलन का प्रतीक बन गया। फिलहाल कंगना का यह बयान न केवल राजनीतिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है, बल्कि यह महिलाओं के सम्मान और भारतीय संस्कृति के प्रति उनके दृष्टिकोण को भी उजागर करता है।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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