

K Bhagyaraj Passed Away: साउथ सिनेमा से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। फिल्मों में अपनी बेहतरीन कहानियों और एक्टिंग से दर्शकों को हंसाने और रुलाने वाले दिग्गज फिल्म एक्टर-डायरेक्टर के भाग्यराज अब हमारे बीच नहीं रहे। अचानक आए कार्डियक अरेस्ट के कारण उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। भाग्यराज के निधन की खबर ने न सिर्फ उनकी फैमिली बल्कि देश भर के सिनेमा प्रेमियों को गहरे सदमे में डाल दिया है। 5 दशक लंबे करियर में उन्होंने जो मुकाम हासिल किया, वह किसी भी सिनेमाई सफर के लिए एक मिसाल है।
भाग्यराज का फिल्मी सफर किसी फिल्मी कहानी से कम रोमांचक नहीं रहा है। भाग्यराज ने साल 1977 में दिग्गज फिल्म प्रोड्यूसर भारतीराजा की फिल्म '16 वायथिनिले' में एक बेहद छोटी भूमिका से अपने करियर की शुरुआत की थी। उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि पर्दे पर चंद पलों के लिए दिखने वाला यह जूनियर कलाकार एक दिन तमिल सिनेमा की तकदीर बदल देगा। इसके बाद भाग्यराज ने निर्देशक की अगली फिल्म 'सिगप्पु रोजक्कल' में न सिर्फ छोटा सा अभिनय किया, बल्कि उसके संवाद लिखकर अपनी लेखनी का लोहा भी मनवाया।
साल 1979 में आई फिल्म 'सुवरिलाधा चिथिरंगल' से भाग्यराज ने बतौर डायरेक्टर कदम रखा और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनकी बनाई फिल्में सिर्फ तमिल भाषा तक सीमित नहीं रहीं। भाग्यराज एक ऐसे दूरदर्शी फिल्ममेकर थे, जिन्होंने उस दौर में भाषा की सीमाओं को पार किया जब ऐसा करना बेहद मुश्किल माना जाता था।
के भाग्यराज की तमाम बेहतरीन फिल्मों के रीमेक हिंदी और तेलुगु भाषाओं में भी बनाए गए। 'मौन गीतंगल', 'अंधा 7 नाटकल', 'मुंडनई मुदिचू' और 'चिन्ना वीदु' जैसी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए रिकॉर्ड बनाए और लोगों के दिलों में खास जगह बनाई।
तमिल सिनेमा के साथ-साथ भाग्यराज का जुड़ाव साहित्य से भी गहरा था। उन्होंने प्रसिद्ध तमिल साप्ताहिक पत्रिका 'भाग्य' का संपादन किया और कई शानदार उपन्यास भी लिखे। भाग्यराज ने कई महत्वपूर्ण सहायक भूमिकाओं के जरिए पर्दे पर दोबारा वापसी की थी।
हाल ही में वह एक्टर धनुष की चर्चित फिल्म 'कुबेरा' में भी एक्टिंग करते नजर आए थे। इसी साल जनवरी में अपने करियर के गोल्डन जुबली समारोह में उन्होंने मंच से एक नई फिल्म और वेब सीरीज डायरेक्ट करने की घोषणा की थी, लेकिन अफसोस कि दर्शकों का यह इंतजार अब हमेशा के लिए अधूरा रह गया।