Jaspal Bhatti Career: जसपाल भट्टी को मिली ‘फ्लॉप शो’ से पहचान, हंसाते-हंसाते दिखाया सिस्टम का आईना

Jaspal Bhatti Comedy: जसपाल भट्टी ने ‘फ्लॉप शो’ के जरिए सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को मजाकिया अंदाज में पेश किया। उनकी साफ-सुथरी कॉमेडी ने 80-90 के दशक के दर्शकों को हंसाते हुए सोचने पर मजबूर किया।
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जसपाल भट्टी (फोटो-सोशल मीडिया)
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Jaspal Bhatti Birth Anniversary Special Story: कॉमेडियन जसपाल भट्टी का नाम 80 और 90 के दशक के टीवी दर्शकों के दिलों में आज भी जिंदा है। जसपाल भट्टी ने कॉमेडी को सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज का आईना बना दिया। जसपाल भट्टी का जन्म 3 मार्च 1955 को अमृतसर में हुआ था। जसपाल भट्टी ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, लेकिन उनका असली जुनून लोगों को हंसाना था।

जसपाल भट्टी ने करियर की शुरुआत नुक्कड़ नाटकों से हुई। बाद में जसपाल भट्टी ने चंडीगढ़ के एक अखबार में कार्टूनिस्ट के रूप में काम किया। कार्टून बनाने के दौरान जसपाल भट्टी को आम आदमी की समस्याओं और सिस्टम की खामियों को समझने का मौका मिला, जो आगे चलकर उनके व्यंग्य का आधार बना। दूरदर्शन पर प्रसारित ‘फ्लॉप शो’ ने जसपाल भट्टी को घर-घर में मशहूर कर दिया। इस शो में सरकारी दफ्तरों की सुस्ती, भ्रष्टाचार, नौकरशाही और आम आदमी की परेशानियों को मजेदार अंदाज में पेश किया जाता था। लोग हंसते-हंसते अपनी ही जिंदगी की झलक देख लेते थे।

फिल्मों में भी छोड़ी छाप

इसके अलावा उल्टा पुल्टा, ‘फुल टेंशन’, ‘हाय जिंदगी बाय जिंदगी’ और ‘थैंक यू जीजा जी’ जैसे शो भी काफी लोकप्रिय रहे। जसपाल भट्टी की खासियत थी कि कॉमेडी में न तो अश्लीलता होती थी और न ही फूहड़पन, बल्कि साफ-सुथरा व्यंग्य होता था। जसपाल भट्टी सिर्फ टीवी तक सीमित नहीं रहे। जसपाल भट्टी ने पंजाबी फिल्म माहौल ठीक है में पुलिस और कानून व्यवस्था पर तीखा व्यंग्य किया। इसके अलावा ‘कुछ मीठा हो जाए’, आ अब लौट चलें और लक़्बाल जैसी फिल्मों में भी जसपाल भट्टी ने अभिनय किया।

सादगी भरा व्यंग्य, अमर विरासत

पत्नी सविता भट्टी के साथ मिलकर जसपाल भट्टी ने ऐसे शो बनाए, जिनमें कम संसाधनों के बावजूद गहरा संदेश होता था। जसपाल भट्टी की कॉमेडी आम जनता की भाषा में होती थी और बिना कटुता के सिस्टम पर तंज कसती थी। 25 अक्टूबर 2012 को एक सड़क हादसे में जसपाल भट्टी का निधन हो गया, लेकिन उनकी यादें आज भी ‘फ्लॉप शो’ के एपिसोड्स में जिंदा हैं। जसपाल भट्टी की विरासत बताती है कि सच्चा व्यंग्य वही है, जो हंसाते-हंसाते सोचने पर मजबूर कर दे।

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