

Jeevan Death Anniversary Special Story: बॉलीवुड के खलनायक ओंकार नाथ धार यानी जीवन का जन्म 24 अक्टूबर 1915 को कश्मीर में हुआ। जीवन ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर अमिट पहचान बनाई। 10 जून 1987 को उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा था, लेकिन उनके निभाए किरदार आज भी दर्शकों की यादों में जिंदा हैं। खासतौर पर 'नारद मुनि' की भूमिका में उन्हें जो लोकप्रियता मिली, वह आज भी मिसाल मानी जाती है।
जीवन के जन्म के तुरंत बाद उनकी मां का निधन हो गया था। वहीं, जब वे केवल तीन साल के थे, तब उनके पिता भी इस दुनिया को छोड़ गए। कठिन परिस्थितियों में पले-बढ़े जीवन के मन में बचपन से ही अभिनेता बनने का सपना था। हालांकि उनका परिवार अभिनय के पक्ष में नहीं था। ऐसे में महज 18 वर्ष की उम्र में उन्होंने घर छोड़ने का बड़ा फैसला लिया और सपनों की नगरी मुंबई का रुख किया। उस समय उनकी जेब में केवल 26 रुपए थे।
मुंबई पहुंचने के बाद जीवन को काफी संघर्ष करना पड़ा। आर्थिक तंगी के बीच वह नौकरी की तलाश में जुटे रहे। इसी दौरान उन्हें मशहूर निर्देशक मोहन लाल सिन्हा के स्टूडियो में काम करने का अवसर मिला। जब मोहन लाल सिन्हा को पता चला कि जीवन अभिनय में रुचि रखते हैं, तो उन्होंने अपनी फिल्म 'फैशनेबल इंडिया' में उन्हें मौका दिया। यहीं से उनके फिल्मी सफर की शुरुआत हुई। इसके बाद धीरे-धीरे उन्हें कई फिल्मों में काम मिलने लगा।
जीवन की सबसे बड़ी पहचान 'नारद मुनि' के किरदार से बनी। उन्होंने अलग-अलग भाषाओं की लगभग 60 फिल्मों में यह भूमिका निभाई। 1950 के दशक में बनी कई पौराणिक फिल्मों में वह नारद के रूप में नजर आए और दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हो गए। उनकी फिल्मों में अफसाना, स्टेशन मास्टर, नागिन, शबनम, हीर-रांझा, जॉनी मेरा नाम, कानून, अमर अकबर एंथनी, धर्म-वीर, लावारिस और सुरक्षा जैसी कई फिल्में शामिल हैं।
जीवन ने बहुत जल्दी समझ लिया था कि उनका व्यक्तित्व पारंपरिक नायक की छवि में फिट नहीं बैठता। ऐसे में उन्होंने खलनायक और चरित्र भूमिकाओं पर ध्यान केंद्रित किया। यह फैसला उनके करियर के लिए बेहद सफल साबित हुआ। ओंकार नाथ धार को 'जीवन' नाम प्रसिद्ध फिल्मकार विजय भट्ट ने दिया था। उन्होंने अभिनय के अलावा फोटोग्राफी, नृत्य, संगीत और एक्शन जैसे क्षेत्रों में भी हाथ आजमाया, लेकिन असली पहचान उन्हें अभिनय से ही मिली।