

Highlights
90 के दशक में अविनाश वाधवान की गिनती बॉलीवुड के हैंडसम चॉकलेटी एक्टर्स में होती थी।
आई मिलन की रात की सक्सेस ने उन्हें इंडस्ट्री में खास पहचान दिलाई।
फिल्म दीवाना के लिए पहले अविनाश वाधवान से अप्रोच किया गया था।
पर्सनल लाइफ के उतार-चढ़ाव के बाद उन्होंने फिल्मों से दूरी बनाई और टीवी की दुनिया में एक्टिव हो गए।
Avinash Wadhawan Biography: फिल्मी दुनिया कब किसे फर्श से अर्श पर पहुँचा दे और कब किसी चमकते स्टार को गुमनामी के अंधेरे में धकेल दे, यह कोई नहीं जानता। 90 के दौर में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कई ऐसे चॉकलेटी चेहरे आए जिन्होंने अपनी पहली ही झलक से दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी। उनकी पॉपुलेरिटी सीधे तौर पर उस समय के बड़े स्टार्स को टक्कर दे रही थी।
ऐसा ही एक नाम अविनाश वाधवान का था, जिनकी गिनती कभी दौर के सबसे हैंडसम और मांग वाले एक्टर्स में होती थी। आज यह एक्टर फिल्मी चकाचौंध से कोसों दूर एक गुमनाम जिंदगी जी रहा है, और इस बदलाव के पीछे छिपी है एक ऐसी कहानी जो किसी फिल्मी ड्रामे से कम नहीं है।
अविनाश वाधवान का असली नाम राकेश वाधवा था और उनका संबंध एक अनुशासित डिफेंस परिवार से था। स्कूल की शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से बी-टेक की डिग्री ली और आगे की पढ़ाई के लिए एमबीए में दाखिला लिया। इसके बाद उनका दिल हमेशा कला और ग्लैमर की दुनिया में ही बसता था।
परिवार की इच्छाओं के खिलाफ जाकर उन्होंने मॉडलिंग के रास्ते चुने और अपने कुछ बेहतरीन फोटोशूट के जरिए शोबिज की दुनिया में कदम रखा। उस शुरुआती दौर में अक्षय कुमार जैसे कई अन्य युवा भी इंडस्ट्री में पैर जमाने के लिए मेहनत कर रहे थे।
आखिरकार साल 1986 में उन्हें फिल्म प्यार हो गया के जरिए बड़े पर्दे पर पहला ब्रेक मिला। हालांकि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कोई खास कमाल नहीं दिखा पाई, लेकिन इसके बाद उन्हें दिग्गज प्रोड्यूसर के साथ काम करने का मौका मिला और उनका सफर आगे बढ़ता चला गया।
कुछ शुरुआती फिल्मों में काम करने के बाद अविनाश के पास अच्छे प्रोजेक्ट्स की कतार लग गई। इसी दौरान उनकी मुलाकात फेमस संगीत कंपनी टी-सीरीज के मुखिया गुलशन कुमार से हुई, जिनके साथ उन्होंने 3 फिल्मों का एक अहम एग्रीमेंट साइन किया। इन फिल्मों में आई मिलन की रात ने बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच दिया और यह सिल्वर जुबली हिट साबित हुई।
कहा जाता है कि इस फिल्म की सक्सेस के बाद सिनेमाघरों में दर्शक दीवाने हो जाते थे। इसके बाद उन्होंने दिव्या भारती, आयशा जुल्का और पूजा भट्ट जैसी उस दौर की टॉप एक्ट्रेस के साथ काम किया। जुनून, दिल की बाजी, पापी गुड़िया, धनवान और बलमा जैसी फिल्मों ने उनकी पहचान एक बेहतरीन चॉकलेटी हीरो के रूप में पक्की कर दी, और दर्शक उनकी एक्टिंग के साथ-साथ उनके सीधे-साधे अंदाज पर फिदा थे।
बड़े पर्दे पर भले ही अविनाश की जोड़ी एक्ट्रेस के साथ खूब जमी हो, लेकिन उनकी पर्सनल लाइफ में उथल-पुथल शुरू हो गई थी। साल 1991 में उन्होंने फेमस पेंटर और मॉडल छाया पारेख के साथ जीवन की नई शुरुआत की थी।
आपसी मतभेदों के चलते दोनों का रिश्ता ज्यादा लंबा नहीं चल सका और साल 2000 में उनका तलाक हो गया। निजी जीवन के इस बड़े झटके ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया और उन्होंने धीरे-धीरे फिल्मों से किनारा करना शुरू कर दिया। उनकी इसी दूरी का फायदा अजय देवगन, सुनील शेट्टी और सैफ अली खान जैसे अन्य कलाकारों ने उठाया, जिन्होंने अपनी स्थिति को मजबूती से संभाल लिया।
एक समय ऐसा भी था जब अविनाश वाधवान की तुलना सीधे तौर पर शाहरुख खान से की जाती थी। खबरों के अनुसार सुपरहिट फिल्म दीवाना के लिए सबसे पहले अविनाश को ही अप्रोच किया गया था। लेकिन उस दौरान उन्होंने केवल सोलो हीरो वाली फिल्में करने का फैसला किया और इस वजह से उन्होंने उस प्रोजेक्ट को ठुकरा दिया।
वह फिल्म शाहरुख खान की झोली में जा गिरी और बॉक्स ऑफिस पर आते ही उसने सक्सेस के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए, जिसने शाहरुख को रातों-रात सुपरस्टार बना दिया। समय के पहिए ने करवट ली और जब अविनाश ने साल 2003 में नताशा से दूसरी शादी करने के बाद बड़े पर्दे पर वापसी की कोशिश की, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सिल्वर स्क्रीन पर काम नहीं मिलने के बाद उन्होंने छोटे रुख का रुख किया और आज भी वे टीवी इंडस्ट्री के कई पॉपुलर सीरियल में अपनी कला का हुनर दिखा रहे हैं।