ओपी नैयर ने लता मंगेशकर से अलग आशा भोसले को दिलाई थी पहचान, एक ही घर में जन्मे कई अनमोल रत्न

Asha Bhosle: मंगेशकर परिवार के संगीत सफर की अनसुनी दास्तां। जानें कैसे ओपी नैयर ने आशा भोसले को लता मंगेशकर के साये से निकालकर एक नई पहचान दिलाई।
Asha Bhosle Death
Asha Bhosle Death (डिजाइन फोटो)
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Asha Bhosle Death: आशा भोसले अब हमारे बीच नहीं रहीं लेकिन भारतीय संगीत जगत में उनके और उनके परिवार का नाम अमर है। भारतीय शास्त्रीय और सुगम संगीत के इतिहास में पंडित दीनानाथ मंगेशकर का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। वे न केवल एक कुशल गायक थे, बल्कि उन्होंने अपने बच्चों में सुरों का ऐसा बीज बोया कि उनके घर में जन्मा हर बच्चा संगीत का महारथी बना।

लता मंगेशकर ने जहाँ अपनी गायकी से 'स्वर कोकिला' का खिताब पाया, वहीं उनके भाई हृदयनाथ और बहनें मीना खडीकर, ऊषा मंगेशकर और आशा भोसले ने भी संगीत जगत में अपनी अमिट छाप छोड़ी।

ओपी नैयर और आशा भोसले: एक नई पहचान की शुरुआत

50 और 60 के दशक में हिंदी फिल्म संगीत पर लता मंगेशकर का वर्चस्व था। उस समय आशा भोसले को अक्सर लता की शैली का अनुकरण करने वाली गायिका के रूप में देखा जाता था। लेकिन संगीतकार ओ.पी. नैयर ने आशा के भीतर छिपी उस चुलबुली और मादक आवाज को पहचाना, जो लता की 'पवित्र और गंभीर' छवि से बिल्कुल अलग थी।

ओपी नैयर ने एक कड़ा फैसला लिया

उन्होंने अपने पूरे करियर में कभी लता मंगेशकर के साथ काम नहीं किया। उन्होंने आशा भोसले को अपनी 'म्यूज' बनाया और 'नया दौर', 'हावड़ा ब्रिज' और 'मेरे सनम' जैसी फिल्मों में ऐसे गीत दिए जिन्होंने आशा भोसले को एक स्वतंत्र पहचान दिलाई। नैयर के संगीत ने साबित कर दिया कि आशा केवल लता की छोटी बहन नहीं, बल्कि अपनी एक अलग शैली की स्वामिनी हैं।

मंगेशकर परिवार के पाँच अनमोल रत्न

यह केवल दो बहनों की कहानी नहीं है। पंडित दीनानाथ के सभी बच्चे गायकी और संगीत रचना में पारंगत थे:

मीना खडीकर: इन्होंने कई मराठी और हिंदी फिल्मों में अपनी आवाज दी और संगीत निर्देशन भी किया।

ऊषा मंगेशकर: 'पिंजरा' जैसी मराठी फिल्मों और 'जय संतोषी मां' के भजनों से इन्होंने घर-घर में पहचान बनाई।

हृदयनाथ मंगेशकर: परिवार के सबसे छोटे सदस्य और एकमात्र भाई, जिन्हें उनकी कठिन शास्त्रीय रचनाओं और बेहतरीन संगीत निर्देशन के लिए जाना जाता है।

एक ही छत के नीचे सुरों का संगम

पंडित दीनानाथ मंगेशकर का अनुशासन इतना कड़ा था कि घर में हर समय रियाज का माहौल रहता था। भले ही दुनिया ने लता और आशा के बीच 'प्रतिद्वंद्विता' की कहानियाँ बुनी हों, लेकिन हकीकत में इन पाँचों भाई-बहनों ने एक-दूसरे के पूरक के रूप में काम किया। ओपी नैयर के क्रांतिकारी संगीत और आशा की मेहनत ने इस वटवृक्ष की चमक को और बढ़ा दिया, जिससे भारतीय संगीत को दो अलग-अलग ध्रुव मिल सके।

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