अमिताभ बच्चन को भी सुननी पड़ी थी खूब खरी-खोटी, लोग कहते थे- एक्टिंग-वैक्टिंग कुछ नहीं आती, बहुत लंबे हो

Amitabh Bachchan Career: अमिताभ बच्चन ने KBC 18 में अपने संघर्ष के दिनों को याद किया। शुरुआती दौर में लोग उनके लंबे कद को लेकर ताने देते थे। अमिताभ ने 1969 में भुवन शोम में वॉइस-ओवर से शुरुआत की थी।
Amitabh Bachchan Struggle Days
अमिताभ बच्चन(फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
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Amitabh Bachchan Struggle Days: बॉलीवुड के मेगास्टार अमिताभ बच्चन ने ‘कौन बनेगा करोड़पति 18’ में अपने संघर्ष के दिनों का एक दिलचस्प किस्सा शेयर किया। ‘कौन बनेगा करोड़पति 18’ के एक खास एपिसोड में अमिताभ बच्चन ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की गोल्ड मेडलिस्ट लवलीना बोरगोहेन, जसवंत कुमार, शर्मिला धनकर और अस्मिता डे से बातचीत की। इस दौरान अस्मिता ने उनसे पूछा कि क्या एक्टर्स को भी शूटिंग के दौरान डायरेक्टर की डांट सुननी पड़ती है।

इस सवाल का जवाब देते हुए अमिताभ बच्चन ने अपने शुरुआती दिनों को याद किया। उन्होंने बताया कि जब वह फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे थे, तब उन्हें कई तरह की आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। लोगों का कहना था कि उन्हें अभिनय नहीं आता और उनका कद भी बहुत ज्यादा लंबा है। अमिताभ ने मजाकिया अंदाज में बताया कि उनसे कहा जाता था कि तुमको तो एक्टिंग-वैक्टिंग कुछ आता ही नहीं, बहुत लंबे हो, अपने घर जाओ।

समय पर नहीं पहुंचे तो फिल्म से निकाल दिया

अमिताभ बच्चन ने यह भी बताया कि काम मिलने के बाद भी मुश्किलें खत्म नहीं हुई थीं। उन्होंने एक ऐसा किस्सा सुनाया, जब सेट पर देर से पहुंचने की वजह से उन्हें फिल्म से ही निकाल दिया गया था। उन्होंने बताया कि उस दौर में उनके पास अपनी गाड़ी तक नहीं हुआ करती थी। एक बार वह किसी और की गाड़ी से सेट पर पहुंचे, लेकिन वहां पहुंचने में देर हो गई। सेट के बाहर निर्देशक उनका इंतजार कर रहे थे। अमिताभ के पहुंचते ही निर्देशक ने उन्हें फिल्म से निकाल दिया।

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वॉइस ओवर से शुरू हुआ था फिल्मी सफर

आज अमिताभ बच्चन को हिंदी सिनेमा का महानायक कहा जाता है, लेकिन फिल्मों में बतौर अभिनेता पहचान बनाने से पहले उन्होंने वॉइस-ओवर आर्टिस्ट के तौर पर भी काम किया था। साल 1969 में उन्होंने मृणाल सेन की फिल्म ‘भुवन शोम’ में अपनी आवाज दी थी। इसके बाद धीरे-धीरे उन्होंने अभिनय की दुनिया में अपनी जगह बनाई और आगे चलकर हिंदी सिनेमा के सबसे प्रभावशाली कलाकारों में शामिल हो गए। अमिताभ का यह सफर दिखाता है कि शुरुआती रिजेक्शन और आलोचनाएं किसी के सपनों का अंत नहीं, बल्कि बड़ी सफलता की शुरुआत भी बन सकती हैं।

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