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अजय देवगन के जुहू बंगले में अनधिकृत बदलाव पर बीएमसी की कार्रवाई
बीएमसी के नोटिस के बाद भी जारी था इंटीरियर का काम
बंगले में सैलून और स्पा खोलने की योजना को लेकर खड़ा हुआ विवाद
Ajay Devgn Juhu Bungalow BMC Action: मुंबई में बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर अजय देवगन का नाम एक नए विवाद के घेरे में आ गया है। जुहू जैसे पॉश इलाके में स्थित उनके बंगले के एक हिस्से पर बीएमसी का बुलडोजर चल चुका है। इस घटना के बाद से ही फिल्म इंडस्ट्री और आम लोगों के बीच चर्चाएं तेज हो गई हैं, क्योंकि किसी ने यह नहीं सोचा था कि एक बड़े स्टार की प्रॉपर्टी पर इस तरह की सख्त कार्रवाई देखने को मिलेगी।
यह पूरा मामला अचानक सामने नहीं आया, बल्कि इसके पीछे नियमों की अनदेखी की कहानी जुड़ी हुई है। बताया जा रहा है कि जुहू की कपोल को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी में बने इस बड़े बंगले के अंदरूनी हिस्से में चुपचाप निर्माण कार्य चल रहा था। बिना किसी वैध परमिशन के सिपोरेक्स ब्लॉक का इस्तेमाल कर दीवारों और खिड़कियों के ढांचे में बदलाव किए जा रहे थे।
स्थानीय निकाय की नजर जब इन अवैध गतिविधियों पर पड़ी, तो प्रशासन हरकत में आया। नियमों के मुताबिक जब कोई काम बिना परमिशन के होता है, तो कानूनी प्रक्रिया के अंदर कदम उठाए जाते हैं और इस मामले में भी प्रशासन ने अपनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद यह सख्त कदम उठाया।
प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की शुरुआत बहुत पहले ही हो चुकी थी जब बीएमसी के विभाग ने नियमों का हवाला देते हुए काम रोकने का आदेश जारी किया था। सितंबर महीने के शुरुआती दिनों में ही मुंबई महानगरपालिका अधिनियम के तहत काम रोकने का नोटिस थमाया गया था।
अजय देवगन के परिवार की ओर से इस नोटिस का जवाब देने के लिए समय की मांग भी की गई थी, लेकिन तय की गई टाइम लिमिट पूरी हो जाने के बाद भी कोई संतोषजनक डॉक्यूमेंट या जवाब पेश नहीं किया गया। बार-बार वॉर्निंग मिलने के बावजूद निर्माण कार्य अंदरखाने जारी रहा, जिसके चलते बीएमसी को मौके पर अपनी भारी-भरकम टीम के साथ उतरना पड़ा।
इस पूरी कार्रवाई की असली जड़ बंगले के कमर्शियल यूज को लेकर चल रहा एक बड़ा विवाद है। कुछ समय पहले ही इस प्रॉपर्टी को एक सैलून और स्पा चलाने वाली कंपनी को 5 साल के लिए लीज पर दिया गया था, जिसकी डील करोड़ों रुपये में तय हुई थी। जैसे ही इलाके में सैलून खुलने की खबर फैली, वहां रहने वाले सोसाइटी के लोग आपत्ति में उतर आए।
स्थानीय वासियों का तर्क था कि एक शांत और रेजिडेनशियल एरिया में इस तरह की कमर्शियल एक्टीविटी शुरू होने से इलाके की शांति में रुकावट आ जाएगी और भारी ट्रैफिक और पार्किंग जैसी बड़ी समस्याएं पैदा हो जाएंगी, जिसकी परमिशन किसी भी सूरत में नहीं दी जानी चाहिए।
स्थानीय लोगों का कड़ा विरोध और लीगल डॉक्यूमेंट्स की कमी ने इस मामले को तूल दे दिया। सोसाइटी के सदस्यों का कहना था कि उन्होंने प्रॉप्रटी को केवल रहने के लिए लीज पर देने की एनओसी दी थी, न कि वहां किसी तरह का बिजनेस चलाने या ढांचे में फेरबदल करने के लिए।
जब तय समय में कोई एनओसी नहीं दिखाया गया, तो सोसाइटी ने बीएमसी के पास लिखित शिकायत दर्ज कराई और नियमों के तहत कार्रवाई की मांग की। इसी शिकायत को आधार बनाकर और तय डेडलाइन के बीत जाने के बाद, बीएमसी ने मौके पर पहुंचकर अनधिकृत निर्माण को पूरी तरह से तोड़ दिया।