

West Bengal Assembly Polls 2026: पश्चिम बंगाल में चुनावी तारीखें जैसे-जैसे करीब आ रही हैं, जमीन पर सियासी पारा उतनी ही तेजी से ऊपर चढ़ने लगा है। कोलकाता के इकबालपुर इलाके में सोमवार को कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां दो प्रमुख राजनीतिक दलों के समर्थक आमने-सामने आ गए।
शांतिपूर्ण माहौल अचानक नारों और हंगामे में तब्दील हो गया, जिसने पूरे इलाके में दहशत पैदा कर दी। पुलिस के हस्तक्षेप के बावजूद स्थिति इतनी बिगड़ गई कि सुरक्षाबलों को बल प्रयोग करने पर मजबूर होना पड़ा। यह घटना दिखाती है कि बंगाल के रण में एक-एक इंच जमीन के लिए संघर्ष कितना तीखा हो चला है।
हुसैन शाह रोड पर चुनावी सरगर्मियां तब तेज हो गईं जब भाजपा उम्मीदवार राकेश सिंह के नेतृत्व में एक बैठक आयोजित की जा रही थी। इस दौरान वहां मौजूद भाजपा कार्यकर्ताओं और तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते बात नारों से आगे बढ़कर धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। दोनों तरफ से समर्थकों की भीड़ बढ़ती गई और पुलिस स्टेशन के बाहर का नजारा किसी युद्ध के मैदान जैसा लगने लगा। स्थानीय लोगों के अनुसार, माहौल काफी पहले से तनावपूर्ण था लेकिन सोमवार को यह पूरी तरह बेकाबू हो गया।
स्थिति तब और ज्यादा तनावपूर्ण हो गई जब भाजपा उम्मीदवार राकेश सिंह अपने समर्थकों के साथ इकबालपुर थाने के बाहर धरने पर बैठ गए। उन्होंने स्थानीय प्रशासन पर पक्षपात करने और विपक्षी कार्यकर्ताओं को परेशान करने के गंभीर आरोप लगाए। जैसे-जैसे भीड़ बढ़ी, पुलिस के लिए कानून-व्यवस्था बनाए रखना मुश्किल होता गया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को अंततः लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। इस कार्रवाई में कम से कम एक व्यक्ति को काफी गंभीर चोटें आने की खबर मिली है, जिसे तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया।
इलाके में शांति बहाल करने के लिए कोलकाता पुलिस ने तुरंत कदम उठाए और घटना स्थल से कई लोगों को हिरासत में लिया। अब तक मिली जानकारी के अनुसार, इस हिंसा के सिलसिले में पुलिस ने कुल नौ लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें पांच भाजपा और चार टीएमसी कार्यकर्ता शामिल हैं।
पुलिस ने तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं ताकि दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके। फिलहाल पूरे इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है और आला अधिकारी स्थिति पर पल-पल की नजर बनाए हुए हैं ताकि फिर से कोई अप्रिय घटना न हो।
भाजपा और टीएमसी दोनों ही एक-दूसरे पर डराने-धमकाने और प्रशासनिक मिलीभगत के आरोप लगा रहे हैं। जैसे-जैसे मतदान का दिन नजदीक आ रहा है, सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनावी हिंसा को रोकना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।