एकला चलो रे: तमिलनाडु की सभी सीटों पर अकेले लड़ेगी सुपरस्टार विजय की TVK; पेरम्बूर से चुनाव लड़ेंगे 'थलपति'

Tamil Nadu Election 2026: अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी 'तमिलगा वेट्री कजगम' ने तमिलनाडु की सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। इससे फैसले से चुनावी हलकों में हलचल है।
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थलपति विजय, फोटो- सोशल मीडिया
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Vijay Political Meeting: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 की रणभेरी बजते ही राज्य के सियासी गलियारों में एक नई और आक्रामक एंट्री हुई है। लंबे समय से स्थापित द्रविड़ियन पार्टियों के वर्चस्व को चुनौती देते हुए सुपरस्टार विजय ने बड़ा दांव खेला है।

उनकी पार्टी तमिलगा वेट्री कजगम की घोषणा है कि वह किसी भी बड़े गठबंधन का हिस्सा बने बिना राज्य की सभी 234 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी। विजय का यह कदम तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है, जो चुनावी मुकाबले को और भी दिलचस्प बनाने के लिए तैयार है।

पेरम्बूर से चुनाव लड़ सकते हैं विजय; युवाओं में भारी क्रेज

राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा विजय की अपनी सीट को लेकर है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, विजय चेन्नई के पेरम्बूर निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ सकते हैं, हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। उनकी संभावित उम्मीदवारी ने विशेष रूप से पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं और युवाओं के बीच जबरदस्त उत्साह पैदा कर दिया है, जो उनके सबसे बड़े समर्थक माने जाते हैं। पार्टी 27 मार्च को मामल्लापुरम में एक हाई-प्रोफाइल सार्वजनिक सभा आयोजित करने वाली है, जहां विजय खुद अपने उम्मीदवारों को जनता के सामने पेश करेंगे और अपनी पार्टी के चुनावी रोडमैप की घोषणा करेंगे।

करूर त्रासदी का दंश अभी तक

विजय का चुनाव प्रचार इस बार कड़े सुरक्षा घेरे और पाबंदियों के बीच होगा। दरअसल, 27 सितंबर 2025 को करूर में विजय के एक कार्यक्रम के दौरान हुई दुखद भगदड़ में 41 लोगों की जान चली गई थी। इस घटना के बाद तमिलनाडु पुलिस और चुनाव आयोग ने सार्वजनिक सभाओं और भीड़ प्रबंधन पर बेहद सख्त गाइडलाइंस लागू कर दी हैं।

इसी के चलते 28 मार्च को चेन्नई के क्षेत्रों (पेरम्बूर, कोलाथुर, विल्लीवाक्कम, अन्ना नगर और विरुगंबक्कम) में होने वाली जनसभाओं के लिए केवल 3,000 लोगों के रहने की ही अनुमति दी गई है। सुरक्षा संबंधी परेशानियों के चलते चुनाव आयोग ने 12 और निर्वाचन क्षेत्रों में प्रचार कार्यक्रम करने के पार्टी के अपील को भी खारिज कर दिया है।

द्रविड़ राजनीति के बीच 'तीसरा मोर्चा' या 'वोट कटर'?

तमिलनाडु में दशकों से सत्ता का मुकाबला मुख्य रूप से दो बड़े द्रविड़ दलों के इर्द-गिर्द घूमता रहा है। ऐसे में विजय और उनकी पार्टी के प्रवेश ने चुनावी मुकाबले में एक नया आयाम जोड़ दिया है। जहां स्थापित गठबंधन अपनी जमीन मजबूत करने में जुट गए हैं तो वहीं विजय का 'एकला चलो' का अभियान उन वोटर्स को आकर्षित कर सकता है जो बदलाव की तलाश में हैं।

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