

Tamil Nadu election results 2026: तमिलनाडु की राजनीति में दशकों से चले आ रहे स्थापित समीकरण अब पूरी तरह से ध्वस्त होते नजर आ रहे हैं। अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम ने अपने पहले ही बड़े चुनावी समर में वो कर दिखाया है, जिसकी कल्पना राज्य के दिग्गज राजनीतिक सूरमाओं ने नहीं की थी।
चुनाव परिणामों के जो आंकड़े सामने आए हैं, उन्होंने न केवल सत्ता के गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि राज्य की सबसे पुरानी और मजबूत पार्टियों में शुमार AIADMK के अस्तित्व पर भी संकट के बादल मंडरा दिए हैं। सड़कों पर समर्थकों का जश्न है, लेकिन बंद कमरों में हो रही राजनीतिक उठापटक ने आम जनता को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या आने वाले दिनों में तमिलनाडु को एक नया और युवा नेतृत्व मिलने वाला है।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने सबको चौंका दिया है। विजय की पार्टी टीवीके 108 सीटें हासिल कर राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। हालांकि, 234 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए जरूरी 118 के जादुई आंकड़े से वह अभी 10 सीटें दूर है। इस जीत ने राज्य की पारंपरिक राजनीति को हिलाकर रख दिया है। टीवीके ने अकेले चुनाव लड़कर यह मुकाम हासिल किया है, जो बताता है कि जनता ने बदलाव के लिए वोट दिया है। अब सवाल यह है कि सरकार किसकी बनेगी और कौन विजय का हाथ थामेगा। इस अनिश्चितता ने राज्य के आम नागरिक के मन में भविष्य की योजनाओं और नीतियों को लेकर एक उत्सुकता और थोड़ी चिंता पैदा कर दी है।
इस चुनावी जीत के साथ ही एआईएडीएमके के भीतर एक भीषण ज्वालामुखी फटता दिख रहा है। पार्टी के कुल 47 विधायकों में से ज्यादातर इस पक्ष में हैं कि उन्हें विजय की पार्टी टीवीके को समर्थन देना चाहिए। सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि यदि पार्टी आलाकमान और पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पाडी के. पलानीस्वामी ने जल्द ही कोई ठोस फैसला नहीं लिया, तो सीवी षणमुगम के नेतृत्व में कम से कम 30 विधायक पार्टी छोड़कर विजय के साथ जा सकते हैं। बुधवार को होने वाली विधायक दल की अहम बैठक का अचानक टल जाना इस बात का पुख्ता संकेत है कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। विधायकों का एक बड़ा धड़ा चाहता है कि कम से कम एक साल के लिए टीवीके को बाहर से समर्थन दिया जाए ताकि राज्य में एक स्थिर सरकार बन सके।
तमिलनाडु की सत्ता की चाबी अब छोटे दलों और रणनीतिक गठबंधनों के पास सिमट गई है। जहां एक ओर एआईएडीएमके टूट की कगार पर है, वहीं दूसरी ओर डीएमके गठबंधन का हिस्सा रही कांग्रेस भी विजय के साथ जाने के विकल्प पर विचार कर रही है।
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राहुल गांधी का विजय को फोन कर जीत की बधाई देना महज शिष्टाचार नहीं, बल्कि भविष्य के गठबंधन के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। इसके अलावा, पीएमके जैसी पार्टियां भी विजय के समर्थन में खड़ी दिख रही हैं। विजय ने पहले ही गठबंधन सरकार की संभावनाओं पर सहमति जता दी है, जिससे छोटे दलों को कैबिनेट में जगह मिलने की उम्मीदें जग गई हैं।