

मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में पूर्ण बहुमत मिलने के बाद भी महायुति सरकार का गठन अभी तक नहीं हो पाया है। इसकी वजह यह है कि एकनाथ शिंदे एक बार फिर से राज्य की महायुति सरकार के मुखिया बनना चाहते हैं। लेकिन चुनाव में राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनी बीजेपी इसके लिए तैयार नहीं है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व में शामिल तमाम नेता देवेंद्र फडणवीस को राज्य का अगला मुख्यमंत्री बनाने के पक्ष में हैं। उस पर एनसीपी नेता अजित पवार ने भी फडणवीस को सीएम बनाने को अपनी सहमति दे दी है। ऐसे में पीएम मोदी के साथ और अजित के विश्वास के कारण फडणवीस की राह और आसान हो गई है।
महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों के लिए हुए चुनाव में बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी मिलकर महायुति के रूप में विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी में शामिल कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (शरदचंद्र पवार), समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय समाज पक्ष के खिलाफ चुनाव लड़ा था।
इस चुनाव में 149 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली बीजेपी ने 88% के स्ट्राइक रेट से 132 सीटें जीती हैं। तो वहीं शिवसेना ने 81 सीटों पर चुनाव लड़ा और 70% की स्ट्राइक रेट से 57 सीटें जीती हैं। इसी तरह अजित पवार की एनसीपी ने 59 सीटों पर चुनाव लड़ा और लगभग 70% की ही स्ट्राइक रेट से 41 सीटों पर उसे जीत मिली है। इस तरह से महायुति के विधायकों की संख्या 230 पहुंच गई है। जो कि सरकार बनाने के लिए निर्धारित 145 सीटों से काफी अधिक है। लेकिन शिंदे की शिवसेना के कारण चुनाव परिणामों की घोषणा के 4 दिन बाद भी महायुति सरकार के गठन में जारी गतिरोध खत्म नहीं हो सका है।
2022 देश के प्रधानमंत्री तथा दुनिया की सबसे बड़ी और अमीर पार्टी के मुखिया नरेंद्र मोदी को राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री एवं शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे लगातार ललकार रहे थे। इसलिए उद्धव को सबक सिखाने के लिए बीजेपी ने शिंदे को बगावत के लिए उकसाया था। बाद में बीजेपी ने शिंदे को शिवसेना में बगावत की अगुवाई का इनाम भी दिया।
105 विधायकों वाली बीजेपी ने 42 विधायकों वाले एकनाथ शिंदे को महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बना दिया था। सत्ता की कमान हाथ में आने के बाद शिंदे ने अपना कद काफी बढ़ा लिया। महायुति ने 2024 का लोकसभा और विधानसभा चुनाव शिंदे के नेतृत्व में लड़ा। लोकसभा में शिंदे का स्ट्राइक रेट सरस रहा तो वहीं विधानसभा चुनाव में महायुति को अविश्वसनीय सफलता मिली है। इसलिए शिंदे सीएम पद पर मजबूती से सीएम पद पर दावा ठोक रहे हैं।
लेकिन हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के बाद बिहार पैटर्न या हरियाणा पैटर्न पर एकनाथ शिंदे को फिर से सीएम बनाने की शिवसेना की मांग को बीजेपी ने सिरे से खारिज कर दिया है। ऐसे में महाराष्ट्र में बीजेपी का मुख्यमंत्री बनना तय माना जा रहा है।
विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी शिंदे को दोबारा सीएम नहीं बनाएगी। ऐसे संकेत बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व पहले ही दे रहे थे। इसलिए शिंदे और उनकी पार्टी के नेताओं ने माइंड गेम खेलना शुरू कर दिया था। शिंदे के करीबी विधायक संजय शिरसाट चुनाव के दौरान एक खास रणनीति के तहत बीजेपी पर दबाव बनाने के लिए बार-बार चेता रहे थे कि शरद पवार और शिंदे संपर्क में हैं। चुनाव बाद कुछ भी हो सकता है।
चुनाव में विपक्षी दलों की दयनीय हार के कारण एकनाथ शिंदे का बार्गेनिंग पावर खत्म हो गया है। 57 सीटें जीतने के बाद भी शिंदे बीजेपी को ब्लैकमेल नहीं कर सकते हैं। क्योंकि अजित के 41 विधायकों के समर्थन के बदौलत बीजेपी के विधायकों की संख्या 173 तक पहुंच गई है। जो कि सरकार बनाने के लिए जरूरी 145 की संख्या से काफी अधिक है।
इसके अलावा बीजेपी को कुछ निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी मिल गया। ऐसे में विरोध के बजाय बीजेपी को समर्थन देकर सत्ता सुख भोगना ही एकनाथ शिंदे की मजबूरी बन गई है।