लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच 47 लाख वोटर्स का अंतर, 6 महीने में कहां से आए इतने वोटर्स, विपक्ष ने EC से मांगा जवाब

महाराष्ट्र चुनाव के नतीजों को लेकर चुनाव आयोग से मिलने के बाद महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख नाना पटोले ने कहा कि महायुति सरकार लोगों के वोटों से नहीं बल्कि दिल्ली में बैठे भाजपा के लोगों की वजह से जीती है।
चुनाव आयोग से मिलने के बाद नाना पटोले
अभिषेक मनु सिंघवी (सौजन्य-एएनआई)
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नई दिल्ली: महाराष्ट्र में महायुति और बीजेपी की भारी बहुमत से जीत को लेकर विपक्ष को संदेह है कि चुनाव में इस बार कुछ गड़बड़ हुई है। सबसे पहले विपक्ष ने इसके लिए ईवीएम में गड़बड़ी की बात की थी। इसके बाद अब विपक्ष का मानना है कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मतदाताओं को लेकर भी कुछ गड़बड़ी की गई है।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों को लेकर चुनाव आयोग से मिलने के बाद महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख नाना पटोले ने मंगलवार को भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि महायुति सरकार लोगों के वोटों से नहीं बल्कि दिल्ली में बैठे भाजपा के लोगों की वजह से जीती है।

नाना पटोले ने संवाददाताओं से कहा, "यह सरकार लोगों के वोटों से नहीं आई है। यह दिल्ली में बैठे भाजपा के लोगों की वजह से बनी है। उन्हें लोगों की परवाह नहीं है। हमने आज चुनाव आयोग से मुलाकात की और देखेंगे कि वे क्या निर्णय लेते हैं।"

47 लाख नए मतदाता

इससे पहले, राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी के नेतृत्व में कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने महाराष्ट्र चुनाव में मतदान को लेकर अपनी आशंकाओं को लेकर चुनाव आयोग से मुलाकात की। इसके बाद मीडिया को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच करीब 47 लाख मतदाताओं के नाम सूची में जोड़े गए।

उन्होंने कहा, "अगर चुनाव सही तरीके से नहीं कराए जाते हैं, तो इससे संविधान के मूल ढांचे को नुकसान पहुंचता है। हमारा कहना है कि चुनाव आयोग को डेटा निकालना चाहिए और हमारे द्वारा उठाए गए मुद्दों पर तथ्य उपलब्ध कराने चाहिए, जिसके आधार पर हम निष्कर्ष निकालेंगे।"

नाम हटाए जाने को लेकर मांगा स्पष्टीकरण

सिंघवी ने आगे कहा, "हमारा पहला मुद्दा महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने के बारे में था। हमने कहा है कि इस प्रक्रिया के लिए निर्धारित फॉर्म और प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए, और हमें इस तरह के व्यापक विलोपन के आधार को समझने के लिए बूथ और निर्वाचन क्षेत्र के हिसाब से डिटेल डेटा की आवश्यकता है। यह डेटा वर्तमान में उपलब्ध नहीं है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि इतनी बड़ी संख्या में नाम किस आधार पर हटाए गए।"

उन्होंने कहा, "हमारा दूसरा मुद्दा मतदाता सूची में नाम जोड़ने के बारे में था। हमने पाया कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच लगभग पांच महीनों में लगभग 47 लाख मतदाताओं के नाम जोड़े गए। इन नामों को जोड़ने के लिए प्रपत्र कहां हैं? किस आधार पर घर-घर जाकर सत्यापन किया गया? हमें वह कच्चा डेटा चाहिए।"

कांग्रेस नेता ने मतदान में सात प्रतिशत के अंतर की ओर भी इशारा किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 118 निर्वाचन क्षेत्र ऐसे हैं जहां लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच मतदान में 25,000 या उससे अधिक वोटों की वृद्धि हुई है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे 23 नवंबर को घोषित किए गए और भाजपा, शिवसेना और एनसीपी के महायुति गठबंधन ने शानदार जीत हासिल की। ​​

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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