केरल के 'कैप्टन' की अनसुनी कहानी: गरीबी से मुख्यमंत्री बनने तक का वो संघर्ष जिसने बदल दी सूबे की किस्मत

Pinarayi Vijayan: पिनाराई विजयन का जीवन गरीबी, संघर्ष और दृढ़ संकल्प की एक बेमिसाल कहानी है। एक हाथकरघा बुनकर से लेकर केरल के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने तक का उनका सफर प्रेरणादायक है।
केरल के 'कैप्टन' की अनसुनी कहानी: गरीबी से मुख्यमंत्री बनने तक का वो संघर्ष जिसने बदल दी सूबे की किस्मत
पिनाराई विजयन, फोटो- सोशल मीडिया
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Pinarayi Vijayan Biography: केरल की राजनीति में एक ऐसा नाम है जो अपनी दृढ़ता और अडिग फैसलों के लिए जाना जाता है। 'कैप्टन' के नाम से मशहूर पिनाराई विजयन का सफर किसी आम राजनेता जैसा नहीं रहा है। हाथकरघा बुनने वाले एक गरीब युवक से लेकर राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने तक की उनकी कहानी हमें बताती है कि संकल्प की शक्ति क्या होती है।

कहा जाता है कि पिनाराई विजयन के नेतृत्व ने न केवल केरल को प्राकृतिक आपदाओं से बाहर निकाला, बल्कि विकास के एक नए मॉडल को दुनिया के सामने पेश किया है।

बुनकर के काम से शुरू किया सफर

पिनाराई विजयन का जन्म 1945 में केरल के कन्नूर जिले के एक बेहद गरीब परिवार में हुआ था। वे अपने माता-पिता की 14वीं संतान थे और उनका बचपन अभावों में बीता। रिपोर्ट्स की मानें तो पिता के साए के बिना बड़े हुए विजयन को आर्थिक तंगी के कारण अपनी पढ़ाई तक बीच में छोड़नी पड़ी थी। गुजारा करने के लिए उन्होंने कुछ समय तक हाथकरघा बुनकर के रूप में काम किया, लेकिन उनके भीतर कुछ बड़ा करने की तड़प हमेशा बरकरार रही। बाद में उन्होंने थलास्सेरी के प्रसिद्ध ब्रेनन कॉलेज से अर्थशास्त्र में स्नातक की डिग्री हासिल की। कॉलेज के दिनों में ही छात्र राजनीति के जरिए उन्होंने सामाजिक बदलाव की मशाल थाम ली थी और यहीं से 'कॉमरेड पिनाराई' के उदय की शुरुआत हुई।

विधानसभा में वो खून से सनी कमीज

विजयन के राजनीतिक जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और भावनात्मक मोड़ 1975 के आपातकाल के दौरान आया। केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध करने के कारण उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और जेल में भीषण यातनाएं दी गईं। लेकिन कोई भी जुल्म इस योद्धा के हौसले को कम नहीं कर सका। जेल से रिहा होने के बाद जब वे केरल विधानसभा पहुंचे, तो उन्होंने अपनी वो खून से सनी हुई कमीज सदन में लहराई जो उन्होंने पुलिस हिरासत के दौरान पहनी थी। उनके इस साहसी कदम ने तत्कालीन सरकार को भारी शर्मिंदगी में डाल दिया था। मात्र 25 वर्ष की आयु में विधायक बनकर उन्होंने सबसे कम उम्र के विधायक का जो रिकॉर्ड बनाया था, वह आज भी कायम है। उनका यह संघर्ष आज भी उन लोगों को ताकत देता है जो व्यवस्था के खिलाफ अपनी आवाज उठाना चाहते हैं।

बिजली मंत्री से मुख्यमंत्री बनने तक के शानदार प्रशासनिक फैसले

पिनाराई विजयन की पहचान केवल एक आंदोलनकारी की नहीं, बल्कि एक कुशल प्रशासक की भी रही है। 1996 में जब उन्हें बिजली मंत्री बनाया गया, तो उन्होंने केरल को बिजली उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए क्रांतिकारी कदम उठाए। उनके कार्यकाल को आज भी राज्य के सबसे बेहतरीन बिजली मंत्रियों में से एक के रूप में याद किया जाता है।

p vijayan

इसके बाद, 2016 में उन्होंने पहली बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उनके नेतृत्व में केरल ने 2018 की सदी की सबसे विनाशकारी बाढ़ का सामना किया, जहाँ उनके समय पर दिए गए निर्देशों और प्रशासनिक सक्रियता ने लाखों लोगों की जान बचाई। उन्होंने 'लाइफ मिशन' जैसी योजनाओं के जरिए बेघर लोगों को छत मुहैया कराई, जो उनके जन-केंद्रित विकास के दृष्टिकोण को दर्शाता है।

विवादों के भंवर के बीच भी बना जनता का अटूट भरोसा

किसी भी बड़े राजनेता की तरह विजयन का करियर भी विवादों से अछूता नहीं रहा है। एसएनसी-लावालीन विवाद से लेकर हालिया गोल्ड स्मगलिंग मामले तक, उन पर और उनके कार्यालय पर कई आरोप लगे। हालांकि, अदालतों ने कई मामलों में उन्हें बरी कर दिया और उन्होंने हमेशा इन आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध बताया। 2021 के चुनावों में उन्होंने दोबारा जीत हासिल कर एक ऐसा इतिहास रच दिया जो केरल में पिछले 40 सालों से नहीं हुआ था- एक पूर्ण कार्यकाल पूरा करने के बाद दोबारा सत्ता में वापसी करना।

वर्तमान में वे केरल के सबसे लंबे समय तक निरंतर सेवा करने वाले मुख्यमंत्री बन चुके हैं। हालांकि 2025 के निलंबुर उपचुनाव में मिली हार और फोन टैपिंग जैसे आरोपों ने उनके सामने नई चुनौतियां खड़ी की हैं, लेकिन वे आज भी अपनी 'आयरन विल' के लिए पहचाने जाते हैं।

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