झारखंड चुनाव 2024: सीता सोरेन पर अमर्यादित टिप्पणी कांग्रेस नेता इरफान को पड़ी भारी, दर्ज हुई FIR, जानें पूरा मामला

भाजपा प्रत्याशी सीता सोरेन के खिलाफ विवादास्पद टिप्पणी करना जामताड़ा से कांग्रेस विधायक इरफान अंसारी के लिए महंगा साबित हुआ है। इरफान ने सीता सोरेन को 'रिजेक्टेड माल' कहा, जो बाद में विवाद का कारण बन गया।
झारखंड चुनाव 2024: सीता सोरेन पर अमर्यादित टिप्पणी कांग्रेस नेता इरफान को पड़ा भारी, दर्ज हुआ FIR,जानें पूरा मामला
सीता सोरेन और इरफान (फोटो सोर्स - सोशल मीडिया)
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रांची : भाजपा प्रत्याशी सीता सोरेन के खिलाफ विवादास्पद टिप्पणी करना जामताड़ा से कांग्रेस विधायक इरफान अंसारी के लिए महंगा साबित हुआ है। इरफान ने सीता सोरेन को 'रिजेक्टेड माल' कहा, जो बाद में विवाद का कारण बन गया। इस बयान के बाद उनके खिलाफ आचार संहिता उल्लंघन के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, डॉक्टर नेहा अरोड़ा ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक बयान नहीं दिए जाने चाहिए। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों को इस संबंध में एडवाइजरी भेजने का आश्वासन दिया।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब इरफान अंसारी ने 24 अक्टूबर को नामांकन के बाद मीडिया से बात करते हुए सीता सोरेन पर अमर्यादित टिप्पणी की। इस बयान के तुरंत बाद, सीता सोरेन ने सोशल मीडिया पर इरफान का वीडियो साझा करते हुए उनसे माफी मांगने की मांग की। उन्होंने कहा कि इरफान ने उनकी व्यक्तिगत बातें भी की हैं, लेकिन इस बार उन्होंने सभी सीमाएं लांघ दी हैं। सीता ने चेतावनी दी कि अगर इरफान ने माफी नहीं मांगी, तो उन्हें उग्र विरोध का सामना करना पड़ेगा।

इरफान का बचाव

इरफान अंसारी ने इस बयान पर सफाई देते हुए कहा कि भाजपा और सीता सोरेन ने उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया है। उन्होंने दावा किया कि वीडियो को क्रॉप करके उनके शब्दों का गलत मतलब निकाला गया है और उन्होंने सीता का नाम तक नहीं लिया था। इरफान ने भाजपा पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि वह जामताड़ा की जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही हैं।

कानूनी कार्रवाई की धमकी

इरफान ने स्पष्ट किया कि वह सीता सोरेन और भाजपा के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे। उन्होंने कहा कि इस मामले में न्यायालय में 100 करोड़ रुपये का दावा पेश करने का विचार भी कर रहे हैं। इरफान ने यह भी कहा कि यह वही भाजपा है जिसने पिछले लोकसभा चुनाव में उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाए थे, जिनका बाद में पर्दाफाश हुआ। उन्होंने जनता को आश्वासन दिया कि वह सच्चाई के साथ हैं और उन्हें गुमराह नहीं किया जा सकेगा। यह मामला न केवल राजनीतिक विवाद को दर्शाता है, बल्कि समाज में महिलाओं के प्रति भाषा और व्यवहार के मानकों पर भी सवाल उठाता है।

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