

Swati Maliwal on Satyendar Jain Arrest: एसीबी ने दिल्ली जल बोर्ड टेंडर मामले में पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन समेत 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में अरविंद केजरीवाल ने सत्येंद्र जैन का पक्ष लेते हुए कहा है कि यह झूठा मामला है और सत्येंद्र जैन बेगुनाह है। उनके इस बयान के बाद भाजपा सांसद स्वाती मालीवाल ने आम आदमी पार्टी के करप्शन की दुकान को लेकर बड़ा खुलासा कर दिया।
स्वाती मालीवाल आम आदमी पार्टी की नेता रह चुकी है और उन्होंने कई सालों तक अरविंद केजरीवाल और आप के साथ काम किया है। उन्होंने कहा है कि आम आदमी पार्टी दिल्ली के बाद चंडीगढ़ में करप्शन की दुकान चला रही है कि सत्येंद्र जैन इसके कलेक्शन एजेंट है।
राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा, "पिछले 10 सालों में दिल्ली में अरविंद केजरीवाल भ्रष्टाचार की दुकान चला रहे थे, चाहे क्लासरूम बनाने का मामला हो या शराब घोटाला, उन्होंने ऐसे कई घोटाले किए। अरविंद केजरीवाल चालाकी से काम करते थे, उन्होंने कोई मंत्रालय नहीं संभाला।"
स्वाति मालीवाल ने आगे कहा, "वे मंत्रियों के जरिए भ्रष्टाचार करवाते थे और जब मंत्री पकड़े जाते थे, तो सारा दोष उन पर मढ़ देते थे ये उन्होंने 10 साल तक किया। अब DJB का जो STP घोटाला सामने आया है, वह बहुत गंभीर है, क्योंकि STP यमुना की सफाई के लिए अहम हैं।"
स्वाति मालीवाल ने बड़ा दावा करते हुए कहा, "जैसे ही दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की करप्शन की दुकान दिल्ली से खत्म हुई तो उन्होंने चंडीगढ़ में करप्शन के बड़े-बड़े मॉल खोल दिए। सत्येंद्र जैन पंजाब में AAP के लिए कलेक्शन एजेंट का काम कर रहे हैं। वे बिल्डर्स और रियल इस्टेट से कमा रहे है। अगर ऐसा नहीं है तो वे कैसे पंजाब के चंडीगढ़ में मंत्रियों से भी ज्यादा लक्जुरियस बंगले में रह रहे है। वे बंगला नंबर 926 सेक्टर 39 में कैसे रह है? जबकि वे सिर्फ पूर्व मंत्री है।"
ये मामला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के अपग्रेडेशन और क्षमता बढ़ाने के लिए जारी टेंडर से जुड़ा है। आरोप है कि टेंडर की तकनीकी शर्तों को इस तरह बदला गया, जिससे एक खास कंपनी 'यूरोटेक इनवायरमेंट प्राइवेट लिमिटेड' को सीधे तौर पर फायदा पहुंचाया जा सके, प्रस्तावित पायलट स्टडी कराए बिना ही ऐसी शर्तें जोड़ी गई।
जिससे दूसरी कंपनियों का कंपीटीशन खत्म हो गया। इससे सरकारी खजाने को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचा। एसीबी को जांच के दौरान कई इलेक्ट्रॉनिक सबूत मिले हैं। प्राइवेट व्यक्त्तियों, बिचौलियों और सरकारी अधिकारियों के बीच हुई बातचीत और ई-मेल के विश्लेषण से सामने आया कि टेंडर के दस्तावेज और कॉरिजॅडम पहले ही आपस में साझा कर लिए गए थे।