

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट की ओर से आज पेगासस मामले पर सुनवाई की गई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़े मामले की किसी भी तरह की रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है। पेगासस जासूसी मामले की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने देश के लिए किसी खतरे को बुलावा देने के समान है।
सुप्रीम कोर्ट ने ये भी संकेत दिए कि वे निजता के उल्लंघन की व्यक्तिगत आशंकाओं पर विचार कर सकता है। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा अपना निर्णय देते हुए कहा कि तकनीकी समिति की रिपोर्ट पर सड़कों पर नहीं किसी तरह की चर्चा नहीं होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीशों की पीठ ने कहा कि ऐसी किसी भी रिपोर्ट को छुआ नहीं जाएगा या यूं कहें कि उससे छेड़छाड़ नहीं की जाएगी जो देश की सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ी हो। कोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्तिगत तौर पर जानना चाहता है कि वह रिपोर्ट में शामिल है या नहीं तो उसे अलग से इसकी जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है। लेकिन रिपोर्ट को कोई दस्तावेज नहीं तैयार किया जाएगा कि उसकी चर्चा सड़क पर की जाए। अदालत ने ये भी कहा कि वे इस बात की जांच करेंगे कि किस हद तक तकनीकी समिति की रिपोर्ट को संबंधित व्यक्ति के साथ शेयर किया जा सकता है। न्यायाधीशों की पीठ ने 30 जुलाई अगली सुनवाई करने का आदेश दिया है। देश की अन्य खबरों के लिए यहां क्लिक करें
पेगासस इस्राइली सॉफ्टवेयर है जिसे मोबाइल को हैक कर निगरानी करने के लिए प्रयोग किया जाता है। 2021 में कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि भारत में कई पत्रकारों, नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के फोन की जासूसी की गई थी। सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस मामले की स्वतंत्र जांच के आदेश दिए गए थे। वर्ष 2021 में कोर्ट ने पेगासस मामले की जांच के लिए तकनीकी समिति और निगरानी समिति गठित की थी। तकनीकी समिति में साइबर सुरक्षा, डिजिटल फॉरेंसिक और नेटवर्क विशेषज्ञ नवीन कुमार चौधरी, प्रभाहरण पी और अश्विन अनिल गुमास्ते को रखा गया था। जांच की निगरानी पूर्व न्यायाधीश आरवी रवींद्रन कर रहे हैं। पूर्व आईपीएस अधिकारी आलोक जोशी और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ संदीप ओबेरॉय भी इनके सहयोगी हैं।