UPI प्रोफाइल से आरोपी तक पहुंची पुलिस, लाल किले से चोरी हुए कलश की सुलझी गुत्थी

Red Fort के पास आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम से सोने के कलश चोरी करने के मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। क्राइम ब्रांच ने 1.5 करोड़ रुपये से अधिक की चोरी की गई संपत्ति बरामद की।
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लाल किले से गायब हुआ करोड़ों का कलश का खुला राज, फोटो- सोशल मीडिया
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Red Fort Golden Kalash Accused Arrested: लाल किला परिसर से चोरी करने वाले आरोपी भूषण वर्मा उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने भूषण के पास से चोरी किया गया सोने और कीमती पत्थरों से जड़ा कलश समेत 100 ग्राम गला सोना भी बरामद किया है।

मुख्य आरोपी भूषण वर्मा को उत्तर प्रदेश के हापुड़ से पकड़ा गया। उसके पास से सोने और कीमती रत्नों से सजा एक कलश और करीब 100 ग्राम पिघला हुआ सोना बरामद किया गया है। शुरुआती जांच में सामने आया कि भूषण विशेष रूप से जैन धर्म के धार्मिक आयोजनों को अपना निशाना बनाता था।

Paytm अकाउंट की प्रोफाइल से खुला राज

पुलिस ने जब मामले की गहराई से जांच शुरू की, तो सीसीटीवी कैमरों में कैद फुटेज खंगाले गए। एक स्पष्ट फोटो को पुलिस ने एडवांस्ड सॉफ्टवेयर की मदद से स्कैन किया। इसी फोटो की सहायता से यह पता चला कि आरोपी ने इस फोटो का इस्तेमाल अपने Paytm अकाउंट की प्रोफाइल बनाने में किया था। इस जानकारी के आधार पर पुलिस ने उसकी पहचान की और मोबाइल नंबर तक पहुंच बनाई। हालांकि, वह नंबर बंद मिला, लेकिन तकनीकी निगरानी के जरिए पुलिस ने आखिरकार हापुड़ में उसकी लोकेशन ट्रैक कर ली और उसे गिरफ्तार कर लिया। इस प्रकार पुलिस की मुस्तैदी ने एक पेटीएम प्रोफाइल के जरिए पूरे मामले का पर्दाफाश कर दिया।

ज्वेलरी का व्यवसाय करता था भूषण

पूछताछ में भूषण ने खुलासा किया कि वह पहले ज्वेलरी का व्यवसाय करता था, लेकिन सट्टे की लत के चलते उसका सब कुछ खत्म हो गया। इसके बाद उसने अपराध की राह पकड़ ली। उसने पुलिस को बताया कि वह यूट्यूब जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जैन धर्म से जुड़े आयोजनों की जानकारी इकट्ठा करता था। फिर खुद को जैन श्रद्धालु की तरह तैयार करता और कार्यक्रमों में शामिल होकर चोरी को अंजाम देता। उसकी इस रणनीति से वह किसी की नजर में नहीं आता था।

भूषण ने कबूल किया कि उसने 3 सितंबर को लाल किले के सामने 15 अगस्त पार्क में आयोजित एक जैन धार्मिक आयोजन के दौरान सोने के कलश की चोरी की। यह आयोजन जैन समुदाय के दसलक्षण महापर्व (28 अगस्त से 9 सितंबर) के अंतर्गत हो रहा था।

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