

उदयपुर विकासखंड के प्राथमिक शाला पेंडरखी में विजय कुमार यादव प्रधान पाठक थे।
वर्ष 2019 में उनके खिलाफ हत्या के प्रयास का आपराधिक मामला दर्ज हुआ था।
अदालत ने 3 जनवरी 2026 को उन्हें 5 साल की सजा सुनाई थी।
सजा मिलने के बाद भी शिक्षा विभाग ने समय पर कोई कार्रवाई नहीं की।
शिकायत मिलने पर 22 अक्टूबर 2026 को शिक्षक के निलंबन का आदेश जारी हुआ।
Chhattisgarh Education Department Teacher Suspended : सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां शासकीय प्राथमिक शाला पेंडरखी में पदस्थ प्रधान पाठक विजय कुमार यादव पर गंभीर आरोप लगे थे। वर्ष 2019 में मणिपुर थाने में उनके खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज हुआ था।
अदालत ने इस मामले में सुनवाई पूरी की। अंबिकापुर के प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने 3 जनवरी 2026 को शिक्षक को दोषी ठहराया। कोर्ट ने उन्हें पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
सजा सुनाए जाने के बाद आरोपी शिक्षक को केंद्रीय जेल अंबिकापुर भेज दिया गया। हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिलने के बाद अक्टूबर 2026 में उनकी रिहाई हुई। ताज्जुब की बात यह है कि दोषसिद्धि और जेल में रहने के बावजूद विभाग अनजान बना रहा।
सामाजिक कार्यकर्ता परवेज आलम गांधी ने इस मामले की शिकायत कलेक्टर से की। उन्होंने आरोप लगाया कि कोर्ट से सजा मिलने के बाद भी शिक्षा विभाग ने समय पर कोई कार्रवाई नहीं की। इससे विभागीय अधिकारियों की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।
मामले में शिकायत दर्ज होने के बाद विभाग हरकत में आया। घटना के करीब नौ महीने बाद 22 अक्टूबर 2026 को निलंबन का आदेश जारी किया गया। इतने लंबे समय तक कार्रवाई न होने से विभाग की कार्यप्रणाली कटघरे में है।
अब सवाल उठ रहे हैं कि सजा मिलने के तुरंत बाद शिक्षक को निलंबित क्यों नहीं किया गया। सरकारी नियमों के तहत 48 घंटे से अधिक जेल में रहने पर स्वतः निलंबन का प्रावधान है।
कलेक्टर तक शिकायत पहुंचने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है। प्रशासन ने तत्कालीन ब्लॉक शिक्षा अधिकारी और क्लस्टर संकुल समन्वयक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उनसे समय पर जानकारी न देने का जवाब मांगा गया है।
कलेक्टर अजीत वसंत ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की बात कही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदार लोगों पर सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
"दोषसिद्धि और जेल में रहने के बावजूद शिक्षा विभाग ने समय पर कार्रवाई नहीं की। विभागीय अधिकारियों की भूमिका संदेहास्पद है, मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।"
— परवेज आलम गांधी, सामाजिक कार्यकर्ता
"मामला संज्ञान में आने के बाद जांच के आदेश दिए गए हैं। तत्कालीन बीईओ और सीएससी को नोटिस जारी किया गया है। जांच के बाद आगे की विभागीय कार्रवाई की जाएगी।"
— अजीत वसंत, कलेक्टर, सरगुजा