

रायपुर में मिल्क मलाई ब्रांड का पनीर सैंपल लैब टेस्ट में फेल हो गया है।
पिछली जांच में इसमें हेयर डाई वाला खतरनाक केमिकल मिलने की पुष्टि हुई थी।
ताजा रिपोर्ट में खतरनाक केमिकल तो नहीं मिला लेकिन मानक टूट गए।
पनीर में नमी की मात्रा तय सीमा से काफी ज्यादा पाई गई है।
नियमों की अनदेखी कर कन्हेरा फैक्ट्री में पनीर का धड़ल्ले से निर्माण हो रहा है।
Raipur Fake Paneer Identification Food Safety Department : रायपुर में खाद्य विभाग की जांच में मिल्क मलाई पनीर एक बार फिर फेल हो गया है। लैब रिपोर्ट के अनुसार इस पनीर में दूध की वसा तय मानक से कम मिली है। मानक के अनुसार वसा पचास प्रतिशत होनी चाहिए जो कि केवल सैंतालीस प्रतिशत ही पाई गई। इसके अलावा पनीर में नमी की मात्रा भी बहुत अधिक दर्ज की गई है।
नमी की अधिकतम सीमा 60 प्रतिशत तय की गई है। लेकिन जांच में नमी 66 प्रतिशत से ज्यादा पाई गई है। इन दोनों बड़ी कमियों के आधार पर प्रयोगशाला ने इस नमूने को अमानक घोषित कर दिया है। गनीमत यह रही कि इस बार की जांच में कोई खतरनाक रसायन नहीं मिला है। पिछली बार इस ब्रांड में हेयर डाई में इस्तेमाल होने वाला केमिकल मिला था।
कन्हेरा गांव में स्थित इस फैक्ट्री का संचालन हिमांशु बंसल द्वारा किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि पिछली बार गंभीर केमिकल मिलने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। छत्तीसगढ़ में एनालॉग पनीर के निर्माण पर पूरी तरह से रोक लगी हुई है। इसके बावजूद इस फैक्ट्री में धड़ल्ले से पनीर का अवैध निर्माण किया जा रहा है।
तैयार किए जा रहे इस पनीर की सप्लाई छत्तीसगढ़ के अलावा ओडिसा तक की जा रही है। खाद्य सुरक्षा विभाग की सुस्ती के कारण लोगों की सेहत से खिलवाड़ जारी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को इस फैक्ट्री पर तुरंत ताला लगाना चाहिए। इस तरह के मामलों में कड़ी कार्रवाई होने से ही मिलावटखोरों पर लगाम लगेगी।