Shardiya Navratri 2026: एक पंडाल में छत्तीसगढ़ की 36 देवियां, चंपारण में उमड़ा आस्था का सैलाब

Chhattisgarh Navratri News: भाटापारा में सजे दुर्गा पंडाल में छत्तीसगढ़ की 36 देवियों की प्रतिमाएं श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। पंडाल में 36 ज्योति कलश भी स्थापित किए गए हैं।
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36 दुर्गा माता की प्रतिमांए(सोर्स- नवभारत)
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Highlights

  • धर्मनगरी चंपारण में भक्ति और आस्था का अनूठा संगम।

  • आराध्य देवियों के दर्शन करने उमड़ रहे भक्त।

  • पंडाल को आकर्षक ढंग से सजाया गया है।

  • छत्तीसगढ़ की 36 देवियों की प्रतिमाएं बनी आकर्षण का केंद्र।

Chhattisgarh 36 Durga Mata idols in Champaran: नवरात्र के अवसर पर धर्मनगरी चंपारण में भक्ति और आस्था का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। यहां भाटापारा में सजे दुर्गा पंडाल में छत्तीसगढ़ की 36 देवियों की प्रतिमाएं श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। आदर्श दुर्गोत्सव समिति और ग्रामवासियों के सहयोग से आयोजित इस धार्मिक आयोजन में 36 ज्योति कलश भी स्थापित किए गए हैं। एक ही स्थान पर प्रदेश की आराध्य देवियों के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

एक ही पंडाल में देवी के विविध स्वरूप

पंडाल में छत्तीसगढ़ी दाई के स्वरूप में विराजित मां दुर्गा के साथ प्रदेश के अलग-अलग अंचलों में पूजी जाने वाली देवियों की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। इन प्रतिमाओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध धार्मिक परंपरा और लोक आस्था की झलक देखने को मिल रही है। नवरात्र के दौरान यहां पहुंचने वाले भक्त देवी के विभिन्न स्वरूपों के दर्शन कर पूजा-अर्चना कर रहे हैं।

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पंडाल को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। यहां सुबह से लेकर देर शाम तक श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी हुई है। माता के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो रहा है। 36 ज्योति कलश की स्थापना ने भी आयोजन की धार्मिक महत्ता को खास बना दिया है।

नवरात्र के दौरान 36 देवियों की प्रतिमाओं और 36 ज्योति कलश वाला यह पंडाल क्षेत्र में आस्था के प्रमुख केंद्र के रूप में आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। श्रद्धालु माता के दर्शन कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना कर रहे हैं।

आयोजन का दूसरा वर्ष, श्रद्धालुओं में उत्साह

आयोजक समिति के अनुसार, इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों में पूजी जाने वाली देवियों के दर्शन एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना है। इससे श्रद्धालुओं को प्रदेश की अलग-अलग आराध्य देवियों के स्वरूपों को एक साथ देखने का अवसर मिल रहा है। समिति और ग्रामवासियों के सहयोग से यह आयोजन दूसरे वर्ष भी किया जा रहा है। पिछले वर्ष के आयोजन से मिली प्रेरणा के बाद इस बार भी धार्मिक उत्साह के साथ तैयारियां की गई हैं। चंपारण के अलावा आसपास के गांवों और दूर-दराज के क्षेत्रों से भी भक्त माता के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

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