कवर्धा में 61 परिवारों की घर वापसी! MLA भावना बोहरा ने पखारे पैर, बोलीं- विधायक नहीं, समाजसेविका बनकर आई हूं

MLA Bhawna Bohra: पंडरिया विकासखंड के बैगा बहुल वनांचल क्षेत्र महिडबरा में आयोजित संस्कृति गौरव अभिनंदन समारोह में 61 परिवारों ने सनातन धर्म में पुनः लौटने की घोषणा की।
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कवर्धा विधायक भावना बोहरा(सोर्स - नवभारत लाइव)
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Highlights

  • कवर्धा में धर्म परिवर्तन और घर वापसी का मामला फिर चर्चा में।

  • संस्कृति गौरव अभिनंदन समारोह में 61 परिवारों की हुई घर वापसी।

  • शॉल और श्रीफल भेंटकर विधायक भावना बोहरा ने किया सम्मानित।

  • समाज के लोगों के साथ मिलकर सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना: विधायक।

Kawarda MLA Bhawna Bohra News: छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में धर्म परिवर्तन और घर वापसी का मामला एक बार फिर चर्चा में है। पंडरिया विकासखंड के बैगा बहुल वनांचल क्षेत्र महिडबरा में आयोजित संस्कृति गौरव अभिनंदन समारोह में 61 परिवारों ने सनातन धर्म में पुनः लौटने की घोषणा की। इस कार्यक्रम में पंडरिया विधायक भावना बोहरा भी शामिल हुईं। उन्होंने पारंपरिक रीति-रिवाज से परिवारों के सदस्यों के पैर पखारे और शॉल-श्रीफल भेंटकर उनका सम्मान किया।

जनजाति एवं वनांचल क्षेत्र सर्व समाज की ओर से आयोजित इस समारोह में बैगा आदिवासी, यादव समाज समेत विभिन्न समुदायों के परिवार शामिल हुए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, सामाजिक प्रतिनिधियों और जनजातीय समाज के प्रमुखों की मौजूदगी रही।

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स्वास्थ्य सुविधा और आर्थिक मदद से धर्म परिवर्तन कराने का आरोप

आयोजकों ने दावा किया कि वनांचल क्षेत्र के कुछ गरीब परिवारों को पिछले कई वर्षों के दौरान स्वास्थ्य सुविधाएं, आर्थिक सहायता और अन्य प्रलोभन देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया गया था। अब इन परिवारों ने अपनी पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से दोबारा जुड़ने का निर्णय लिया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

विधायक भावना बोहरा ने पखारे पैर, शॉल-श्रीफल देकर किया सम्मान

कार्यक्रम के दौरान विधायक भावना बोहरा ने 61 परिवारों के सदस्यों का पैर पखारकर स्वागत किया। इसके बाद उन्हें शॉल और श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी संस्कृति, परंपराओं, पूर्वजों की विरासत और ग्राम देवी-देवताओं के प्रति आस्था से जुड़ी हुई है। भगवान बिरसा मुंडा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने जनजातीय अस्मिता और संस्कृति की रक्षा के लिए संघर्ष किया था। अपनी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को सहेजकर रखना प्रत्येक समाज की जिम्मेदारी है।

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बोलीं- विधायक नहीं, समाजसेविका बनकर आई हूं

भावना बोहरा ने कहा कि वह इस आयोजन में विधायक के रूप में नहीं, बल्कि समाजसेविका के तौर पर शामिल हुई हैं। उनका उद्देश्य समाज के लोगों के साथ मिलकर सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना और आने वाली पीढ़ियों तक परंपराओं को पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि संस्कृति और समाज के संरक्षण का यह प्रयास आगे भी जारी रहेगा। इस दौरान उन्होंने अपने विरोधियों पर भी निशाना साधा। बोहरा ने कहा कि उन्हें बदनाम करने की कोशिशों से वह पीछे हटने वाली नहीं हैं।

पहले भी 500 से अधिक परिवारों की वापसी का कर चुकी हैं दावा

गौरतलब है कि भावना बोहरा इससे पहले भी 500 से अधिक परिवारों की सनातन धर्म में वापसी कराने का दावा कर चुकी हैं। महिडबरा में 61 परिवारों के अभिनंदन के बाद एक बार फिर क्षेत्र में जनजातीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और परंपराओं के संरक्षण का मुद्दा चर्चा में आ गया है।