

बचेली में तीसरे दिन भी आर-पार की लड़ाई।
मुख्य गेट पर युवाओं का कब्जा।
भर्ती की मांग पर अड़ा आंदोलन।
प्रबंधन के सामने बड़ा संकट।
Protest to Recruitment Demand in Dantewada NMDC Plant: स्थानीय युवाओं की भर्ती की मांग ने राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) की बचेली परियोजना में बड़ा गतिरोध खड़ा कर दिया है। एल-1 और एल-2 पदों पर भर्ती में देरी के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन तीसरे दिन भी जारी रहा। मेन चेक पोस्ट स्थित प्लांट के मुख्य गेट पर प्रदर्शनकारी युवाओं और ग्रामीणों ने अनिश्चितकालीन धरना देकर कर्मचारियों की आवाजाही रोक दी। बुधवार को ड्यूटी पर पहुंचे करीब 600 नियमित कर्मचारी गेट के भीतर प्रवेश नहीं कर सके।
प्रवेश को लेकर कर्मचारियों और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस हुई, जो धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। इस गतिरोध के कारण परियोजना का उत्पादन लगातार दूसरे दिन पूरी तरह ठप रहने की जानकारी सामने आई है। भर्ती के मुद्दे पर शुरू हुआ आंदोलन अब देश की प्रमुख लौह अयस्क उत्पादक परियोजनाओं में से एक के कामकाज को प्रभावित कर रहा है।
बुधवार को एनएमडीसी प्रबंधन के आदेश पर करीब 600 नियमित कर्मचारी काम पर पहुंचे थे। लेकिन मुख्य गेट पर पहले से मौजूद प्रदर्शनकारी युवाओं और ग्रामीणों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। प्रवेश को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हुई, जो देखते ही देखते धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। गेट पर बने गतिरोध के कारण कर्मचारी प्लांट के भीतर नहीं जा सके और उत्पादन शुरू नहीं हो पाया।
प्रदर्शनकारी युवाओं का कहना है कि एल-1 और एल-2 पदों पर भर्ती में लगातार हो रही देरी से स्थानीय बेरोजगारों में नाराजगी बढ़ रही है। वे भर्ती प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट निर्णय और समयबद्ध कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक मांगों पर ठोस पहल नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।
एनएमडीसी की बचेली परियोजना में उत्पादन बंद होने से आर्थिक नुकसान का सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है। लौह अयस्क का उत्पादन रुकने से खदान से निकासी, लोडिंग और आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। हालांकि, वास्तविक नुकसान का आकलन इस बात पर निर्भर करेगा कि इन दो दिनों में कितना उत्पादन प्रभावित हुआ, कितना अयस्क स्टॉक में उपलब्ध था और आपूर्ति कितनी बाधित हुई।
परियोजना की पुरानी प्रकाशित उत्पादन क्षमता लगभग 1.1 करोड़ टन सालाना रही है। इस क्षमता के आधार पर औसतन करीब 30 हजार टन प्रतिदिन उत्पादन का स्तर निकलता है। यदि उदाहरण के तौर पर लौह अयस्क का औसत मूल्य 2,000 से 4,000 रुपये प्रति टन माना जाए, तो एक दिन के संभावित प्रभावित उत्पादन का सकल मूल्य लगभग 6 से 12 करोड़ रुपये और दो दिन का लगभग 12 से 24 करोड़ रुपये बैठ सकता है।
यह गणना केवल पुरानी उत्पादन क्षमता और अनुमानित मूल्य पर आधारित है। इसमें परिचालन लागत, उपलब्ध स्टॉक, वास्तविक उत्पादन और बिक्री पर पड़े असर का हिसाब शामिल नहीं है। यदि इन नुकसानों को भी जोड़ा जाये तो NMDC के प्रतिदिन नुकसान का आंकड़ा और बड़ा हो सकता है। यदि और आंदोलन लंबा खींचा तो नुकसान का आंकड़ा बेहद अधिक हो सकता है।
आंदोलन का मुख्य मुद्दा एल-1 और एल-2 पदों पर भर्ती में देरी है। स्थानीय युवा इन पदों पर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाने और रोजगार के अवसरों को लेकर स्पष्टता की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि भर्ती को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से बेरोजगार युवाओं में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
बस्तर के औद्योगिक प्रतिष्ठानों में स्थानीय रोजगार का मुद्दा लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। क्षेत्र की खनिज संपदा से बड़े पैमाने पर औद्योगिक गतिविधियां संचालित होती हैं। ऐसे में स्थानीय युवाओं की अपेक्षा रहती है कि उन्हें भी रोजगार के अवसरों में उचित भागीदारी मिले। इसी अपेक्षा के बीच भर्ती में देरी का विवाद अब उत्पादन बंद होने तक पहुंच गया है।
मुख्य गेट पर धरने के तीसरे दिन भी गतिरोध बना रहा। दोनों पक्षों के बीच बातचीत बेनतीजा रहने की जानकारी है। एक ओर स्थानीय युवा भर्ती को लेकर ठोस निर्णय चाहते हैं, तो दूसरी ओर कर्मचारियों के प्रवेश में बाधा के कारण परियोजना का परिचालन प्रभावित हो रहा है। अब निगाहें एनएमडीसी प्रबंधन की अगली पहल पर टिकी हैं।
भर्ती प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट समयसीमा और प्रदर्शनकारियों से संवाद इस विवाद के समाधान की दिशा में अहम हो सकते हैं। यदि जल्द सहमति नहीं बनी, तो उत्पादन प्रभावित रहने की अवधि बढ़ने के साथ आर्थिक दबाव भी बढ़ सकता है। भर्ती की मांग पर शुरू हुआ यह आंदोलन अब एनएमडीसी के उत्पादन और स्थानीय रोजगार, दोनों से जुड़ा बड़ा सवाल बन गया है।