

Russia Sanctions Bill US: अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस के खिलाफ नए सैंक्शंस बिल को मंजूरी दे दी है। इस कदम के बाद रूस और अमेरिका के बीच टेंशन बढ़ने की चर्चा तेज हो गई है। क्रेमलिन ने चेतावनी दी है कि नए सैंक्शंस यूक्रेन वॉर के पीसफुल सॉल्यूशन की कोशिशों को और कॉम्प्लिकेट कर सकते हैं।
वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने अमेरिकी संसद के इस फैसले का वेलकम किया है। नए लॉ का एक अहम प्रोविजन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से ऑयल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है।
अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने बुधवार को ‘लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट 2026’ को 262 के मुकाबले 159 वोटों से पास किया। इससे पहले अगस्त में अमेरिकी सीनेट भी इस बिल को 86-11 के वोट से मंजूरी दे चुकी है।
अब बिल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सिग्नेचर के लिए भेजा गया है। यह लॉ साउथ कैरोलिना के दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया है। बताया गया है कि उन्होंने इस प्रपोजल पर एक साल से अधिक समय तक काम किया था। जुलाई 2026 में उनके निधन के बाद बिल का नाम उनके सम्मान में रखा गया।
प्रपोज्ड लॉ में रूस के एनर्जी और डिफेंस सेक्टर्स पर दबाव बढ़ाने के कई प्रोविजंस शामिल हैं। इसके तहत रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, उनके करीबी लोगों, बैंकों और प्रमुख फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस पर कड़े सैंक्शंस लगाए जा सकते हैं।
इसके अलावा रूस के ‘शैडो फ्लीट’ टैंकरों पर भी एक्शन का प्रोविजन है। इन जहाजों पर सैंक्शंस से बचकर रूसी ऑयल के बिजनेस में मदद करने के आरोप लगते रहे हैं।
बिल का सबसे अहम इकोनॉमिक प्रोविजन ट्रंप को रूसी ऑयल और गैस के बड़े बायर्स देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देना है। इसका संभावित असर रूस से बड़ी मात्रा में एनर्जी खरीदने वाले देशों पर पड़ सकता है।
रूस से क्रूड ऑयल की खरीद के मामले में भारत और चीन प्रमुख बायर्स में शामिल हैं। इसलिए नए अमेरिकी लॉ के संभावित असर को लेकर दोनों देशों के एनर्जी मार्केट पर नजर बनी हुई है। हालांकि बिल सीधे भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू नहीं करता, बल्कि राष्ट्रपति को ऐसा कदम उठाने का अधिकार देता है।
विधेयक में नेचुरल गैस खरीद से जुड़ी 15 प्रतिशत की छूट का भी प्रोविजन बताया गया है। अगर कोई देश रूस की कुल नेचुरल गैस का 15 प्रतिशत से कम खरीदता है और खरीद घटाने की दिशा में ठोस कदम उठाता है, तो उस पर टैरिफ से जुड़ी छूट लागू हो सकती है।
क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि नए सैंक्शंस यूक्रेन वॉर के पीसफुल सॉल्यूशन को और मुश्किल बना सकते हैं। रूस और यूक्रेन के बीच वॉर फरवरी 2022 से जारी है और पीस टॉक्स को लेकर अभी भी डेडलॉक बना हुआ है।
वहीं, जेलेंस्की ने सैंक्शंस बिल के पास होने का वेलकम करते हुए अमेरिकी सांसदों का आभार जताया। बिल में ईरान पर मौजूदा सैंक्शंस को अगले पांच वर्षों तक बढ़ाने का प्रोविजन भी शामिल है।