

रायपुर के खाद्य विभाग का एक आदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
यह आदेश केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के राज्योत्सव दौरे से ठीक पहले जारी हुआ।
आदेश में खाद्य विभाग के अफसरों और कर्मचारियों की उपस्थिति अनिवार्य की गई है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस पत्र को शेयर कर भाजपा पर तंज कसा।
प्रशासन या भाजपा की ओर से अभी इस मामले में आधिकारिक बयान नहीं आया है।
Raipur Food Department Viral Order Controversy : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह रायपुर के दौरे पर आ रहे हैं। वे राज्योत्सव 2026 के समापन समारोह में शामिल होंगे।
उनके आने से ठीक पहले खाद्य विभाग का एक पत्र वायरल हुआ है। यह आदेश कलेक्टर कार्यालय रायपुर की खाद्य शाखा से जारी किया गया है। पत्र जारी होने की तारीख 2 नवंबर 2026 दर्ज है।
आदेश में 3 नवंबर को होने वाले शासकीय कार्यक्रम का जिक्र किया गया है। इसमें सभी अफसरों और कर्मचारियों की मौजूदगी जरूरी बताई गई है।
अधिकारियों को शाम 4 बजे से 7 बजे तक उपस्थित रहना होगा। सभी को आपस में तालमेल बनाकर काम संभालने के निर्देश दिए गए हैं।
आदेश का पालन बहुत कड़ाई से करने को कहा गया है। यह आदेश सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया जा रहा है।
इस पत्र की प्रतिलिपि कई विभागों को भेजी गई है। इनमें संचालनालय और स्टेनो टू कलेक्टर का नाम शामिल है।
प्रतिलिपि की एक लाइन में शासकीय उचित मूल्य दुकान के अध्यक्षों का जिक्र है। इसमें दुकान संचालकों और विक्रेताओं को भी शामिल किया गया है।
इसके बाद से ही विपक्ष को सरकार पर हमला करने का मौका मिल गया है। कांग्रेस इस मुद्दे को जोर-शोर से उठा रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस आदेश को अपने एक्स हैंडल पर साझा किया है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भाजपा भीड़ दिखाने के लिए परेशान है।
बघेल ने आरोप लगाया कि सरकारी कर्मचारियों को भीड़ बढ़ाने के लिए बुलाया जा रहा है। जनता इस कार्यक्रम में खुद से नहीं आ रही है।
भूपेश बघेल ने अपने पोस्ट में एक और दावा किया है। उन्होंने लिखा कि राशन दुकानदारों से 10-10 लोग लाने को कहा गया है।
हालांकि वायरल आदेश के दिखने वाले हिस्से में ऐसी कोई शर्त नहीं लिखी है। इस दावे की अभी तक कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
इस पूरे विवाद पर जिला प्रशासन की ओर से कोई बयान नहीं आया है। भाजपा ने भी अभी तक कोई आधिकारिक सफाई नहीं दी है।