ये हैं PF का फंडा, 50,000 की सैलरी का ऐसे बनेगा 2.5 करोड़

पीएफ अकाउंट में 2.5 करोड़ रुपये तक का फंड जमा करवाना चाहते है, तो इसके लिए आपकी सैलरी यानी सैलरी और बेसिक पे 50,000 रुपये तक होनी चाहिए। साथ ही आपको कम से कम 30 सालों तक नौकरी करनी होगी।
EPF Employees will get hike Minimum wage Limit
ईपीएफओ (सौजन्य : सोशल मीडिया)
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नई दिल्ली : एम्पलॉयी प्रोविडेंट फंड यानी ईपीएफ एक ऐसी लोकप्रिय सेविंग स्कीम है, जिसका उद्देश्य सैलरीधारक कर्मचारियों को रिटायरमेंट के लिए फाइनेंशियल सिक्योरिटी देना है। ईपीएफ योजना के 1952, ईपीएफ स्कीम एक्ट के 1976, 1976 के ईडीएलआई एक्ट और 1995 के पेंशन स्कीम एक्ट के अंतर्गत संचालित होता है।

इस स्कीम के अंतर्गत, एम्पलॉयी और एम्पॉलयर दोनों को कर्मचारी की बेसिक सैलरी का 12-12 प्रतिशत हिस्सा ईपीएफ अकाउंट में योगदान देना होता है। इस स्कीम में हर साल ब्याज को रिवाईव किया जाता है, जो कि पूरी तरह से टैक्स फ्री होता है। ईपीएफ से रिटायरमेंट के समय कर्मचारी को पीएफ अकाउंट में जमा की गई राशि की एकमुश्त रकम मिलती है, जिसमें जमा हुआ ब्याज भी शामिल होता है।

50000 सैलरी होने पर ऐसे होगा 2.5 करोड़ का फंड

यदि आप पीएफ अकाउंट में 2.5 करोड़ रुपये तक का फंड जमा करवाना चाहते है, तो इसके लिए आपकी सैलरी यानी सैलरी और बेसिक पे 50,000 रुपये तक होनी चाहिए। साथ ही आपको कम से कम 30 सालों तक नौकरी करनी होगी। साथ ही इसके लिए आपको पीएफ फंड पर 8.1 प्रतिशत का इंटरेस्ट मिलना चाहिए। इसके अलावा आपकी सैलरी में सालाना 5 प्रतिशत तक की बढ़त होनी चाहिए। अगर आप इन सभी जरूरतों को पूरा करते है, तो रिटायरमेंट तक आपके पास 2.5 करोड़ रुपये तक का फंड रह सकता है।

ईपीएफओ मेंबर बनने की पात्रता

ईपीएफओ सदस्य बनने के लिए आपको संगठित सेक्टर में काम करना होता है, जिसमें 20 या उससे ज्यादा कर्मचारियों वाली कंपनी का होना जरूरी है। ईपीएफओ का सदस्य होने पर सेविंग, इंश्योरेंस कवर, पेंशन और इंटरेस्ट फ्री ब्याज मिलता है। इसके अलावा भी आप इमरजेंसी में इस फंड से पैसा भी निकाल सकते हैं।

ईपीएफओ अकाउंट में टैक्स पर छूट

अगर आपके पास ईपीएफओ अकाउंट है और उसमें हर महीने पीएफ जमा हो रहा है, तो ये टैक्स बचाने का सबसे बेहतरीन विकल्प है। आपको जानकारी दें कि ये सुविधा नई टैक्स रिजीम में नहीं पायी जाती है, इसके लिए आपको पुरानी टैक्स रिजीम का चुनाव करना होगा। अगर आप पुरानी टैक्स रिजीम को चुनते हैं, तो आपको इनकम टैक्स एक्ट 80 सी के अंतर्गत, अपनी सैलरी पर बनने वाले टैक्स में 12 प्रतिशत तक की सेविंग्स कर सकते हैं।

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