

Tax Notice ITR Filing Guide: देश भर में करदाता समय पर अपना ITR दाखिल करते हैं, लेकिन इसके बाद भी विभाग से नोटिस मिल जाता है। इस अचानक आए नोटिस को देखकर घबराने के बजाय यह समझना जरूरी है कि हर नोटिस का मतलब पेनल्टी नहीं होता, बल्कि कई बार यह सिर्फ जानकारी स्पष्ट करने के लिए होता है।
करदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे अपना ईमेल और ई-फाइलिंग पोर्टल चेक करते रहें, ताकि किसी नोटिस का समय पर जवाब दिया जा सके। नोटिस को अनदेखा करने से गंभीर कानूनी समस्या हो सकती है, इसलिए निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवश्यक डाक्यूमेंट्स के साथ ऑनलाइन जवाब सबमिट करना ही सबसे सुरक्षित उपाय है।
अगर ITR प्रोसेस करते समय विभाग को आपके दावों और उनके पास मौजूद आंकड़ों में कोई अंतर दिखता है, तो सेक्शन 143(1)(a) के तहत नोटिस भेजा जाता है। ऐसे में करदाता को अपने ITR और टैक्स क्रेडिट रिकॉर्ड को ध्यान से मिलाना चाहिए और अगर आंकड़ों में बदलाव सही है, तो सहमति देनी चाहिए।
अगर आपके रिटर्न में कोई जरूरी जानकारी छूट गई है या फॉर्म भरने में कोई स्पष्ट गलती हुई है, तो सेक्शन 139(9) के तहत डिफेक्टिव ITR का नोटिस आता है। इस नोटिस में बताई गई कमी को समय पर ठीक करना जरूरी है, वरना निर्धारित समय के बाद आपका ITR पूरी तरह इनवैलिड माना जा सकता है।
जब असेसिंग ऑफिसर को आपकी आय या दावों से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी या दस्तावेजों की आवश्यकता होती है, तो सेक्शन 142(1) का नोटिस भेजा जाता है। यह नोटिस उन लोगों को भी मिल सकता है जिन्होंने इनकम टैक्स रिटर्न नहीं भरा है। ऐसे में मांगे गए दस्तावेजों को ऑनलाइन समय पर सबमिट करना चाहिए।
अगर आपका ITR स्क्रूटनी जांच के लिए चुना जाता, तो आपको सेक्शन 143(2) के तहत नोटिस मिलता है। इसका मतलब है कि विभाग आपके द्वारा घोषित आय, कटौतियों और छूट के दावों की गहनता से जांच करना चाहता है। ऐसे में करदाता को पूछे गए सभी सवालों के प्रामाणिक जवाब देने पड़ते हैं।
अगर आयकर अधिकारी को लगता है कि आपकी कोई आय असेसमेंट से बाहर रह गई है या छिपाई गई है, तो सेक्शन 148 का नोटिस भेजा जाता है। इसके अलावा, पिछले वर्षों का टैक्स बकाया होने पर विभाग सेक्शन 245 के तहत इस साल के रिफंड को पुराने बकाये से एडजस्ट करने का नोटिस भेजता है।
रिकॉर्ड में मौजूद किसी स्पष्ट गणितीय गलती को ठीक करने के लिए विभाग द्वारा सेक्शन 154 के तहत सुधार का नोटिस जारी किया जाता है। वहीं, अगर असेसमेंट ऑर्डर में कोई गलती पाई जाती है, तो कमिश्नर सेक्शन 263 के तहत इसकी दोबारा जांच का आदेश दे सकता है, इसलिए समय पर सही जवाब देना जरूरी है।