RBI Big Move: अब बैंक ग्राहकों पर नहीं थोप सकेंगे बीमा और निवेश योजनाएं, जानिए कब से लागू होगा नियम

RBI New Rules 2027: ग्राहकों को गलत तरीके से वित्तीय उत्पाद बेचने और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डार्क पैटर्न के इस्तेमाल पर RBI ने सख्ती दिखाई है। अब बैंकों को ग्राहकों की स्पष्ट सहमति लेना अनिवार्य होगा।
RBI Cracks Down on Mis-Selling Banks Can’t Force Insurance, Investment Plans on Customers
भारतीय रिजर्व बैंक (सोर्स- सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

RBI Banking Regulations: अगर आप बैंक से लोन लेते हैं, क्रेडिट कार्ड बनवाते हैं या निवेश योजनाओं में पैसा लगाते हैं, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ग्राहकों को गलत तरीके से वित्तीय उत्पाद बेचने यानी मिस-सेलिंग पर रोक लगाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

15 जून 2026 को जारी किए गए ये नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे। RBI का कहना है कि बैंकिंग क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने और ग्राहकों का भरोसा मजबूत करने के लिए यह कदम उठाया गया है। नए नियमों के बाद ग्राहकों को अनचाहे बीमा, निवेश योजनाओं या अन्य वित्तीय उत्पादों की जबरन बिक्री से राहत मिलने की उम्मीद है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डार्क पैटर्न पर रोक

RBI ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों को अपनी वेबसाइट, मोबाइल ऐप और अन्य डिजिटल माध्यमों पर डार्क पैटर्न का इस्तेमाल करने से प्रतिबंधित कर दिया है। डार्क पैटर्न ऐसी डिजिटल तकनीकें होती हैं, जिनके जरिए ग्राहकों को भ्रमित कर किसी सेवा या उत्पाद को चुनने के लिए प्रेरित किया जाता है। कई बार ग्राहक बिना पूरी जानकारी के किसी विकल्प पर क्लिक कर देते हैं या अनजाने में किसी सेवा के लिए सहमति दे बैठते हैं। नए नियमों के तहत बैंकों को अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म की नियमित समीक्षा करनी होगी ताकि ग्राहकों को गुमराह करने वाले फीचर्स और डिजाइन हटाए जा सकें।

RBI ने पहली बार तय की मिस-सेलिंग की परिभाषा

केंद्रीय बैंक ने पहली बार स्पष्ट किया है कि किन परिस्थितियों को मिस-सेलिंग माना जाएगा। यदि किसी ग्राहक को उसकी वित्तीय जरूरतों और प्रोफाइल के अनुरूप न होने वाला उत्पाद बेचा जाता है, गलत या अधूरी जानकारी दी जाती है, या बिना उचित सहमति के कोई वित्तीय उत्पाद दिया जाता है, तो उसे मिस-सेलिंग माना जाएगा। इसके अलावा किसी एक सेवा के साथ दूसरे उत्पाद को अनिवार्य रूप से जोड़कर बेचना भी नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।

नियम तोड़ने पर लौटाना पड़ सकता है पैसा

RBI के नए दिशा- निर्देशों के अनुसार यदि किसी मामले में मिस-सेलिंग साबित होती है, तो संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था को ग्राहक का पैसा वापस करना पड़ सकता है। साथ ही ग्राहक को बिक्री रद्द होने की पूरी जानकारी देना भी अनिवार्य होगा। इस प्रावधान से ग्राहकों के अधिकार पहले की तुलना में अधिक मजबूत होंगे और वित्तीय संस्थानों की जवाबदेही बढ़ेगी।

ग्राहक की स्पष्ट सहमति होगी अनिवार्य

नए नियमों के तहत किसी भी वित्तीय उत्पाद को बेचने से पहले ग्राहक की सूचित और स्पष्ट सहमति लेना जरूरी होगा। बैंक यह नहीं मान सकते कि ग्राहक ने पहले से ही किसी सेवा के लिए सहमति दे रखी है। ग्राहक की मंजूरी का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना भी वित्तीय संस्थानों के लिए अनिवार्य होगा। RBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि बैंक ग्राहकों पर अतिरिक्त सेवाएं या उत्पाद खरीदने का दबाव नहीं बना सकते। किसी भी अतिरिक्त सेवा या उत्पाद की पेशकश पूरी जानकारी और ग्राहक की इच्छा के आधार पर ही की जानी चाहिए।

फीस, जोखिम और लाभ की जानकारी पहले देनी होगी

बैंकों को अब किसी भी वित्तीय उत्पाद की बिक्री से पहले उससे जुड़े जोखिम, शुल्क, लाभ और नियमों की स्पष्ट जानकारी ग्राहकों को देनी होगी। इसके अलावा ग्राहकों को मार्केटिंग कॉल, प्रमोशनल मैसेज और विज्ञापन संचार से बाहर निकलने (Opt-Out) का आसान विकल्प भी उपलब्ध कराना होगा।

वित्तीय क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि RBI के ये नए नियम बैंकिंग सेवाओं को अधिक पारदर्शी बनाएंगे और ग्राहकों को बेहतर सुरक्षा प्रदान करेंगे। साथ ही इससे वित्तीय संस्थानों की जवाबदेही बढ़ेगी और पूरे बैंकिंग तंत्र में भरोसा मजबूत होगा।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com