सुस्त रही देश के सर्विस सेक्टर की रफ्तार, जनवरी में ग्रोथ रेट में आयी गिरावट

सर्वेक्षण में कहा गया कि नए व्यवसाय में निरंतर सुधार और बढ़ती क्षमता दबाव ने सर्विस प्रोवाइडर को पिछली वित्तीय तिमाही के प्रारंभ में अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती करने के लिए प्रेरित किया।
Service sector activity in the country grew in October on the back of strong demand
सर्विस सेक्टर (सौजन्य : सोशल मीडिया)
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नई दिल्ली : भारत के सर्विस सेक्टर का ग्रोथ रेट सेल्स और प्रोडक्शन में हल्की बढ़त के बीच में जनवरी में 2 सालों में सबसे धीमी रफ्तार से आगे बढ़ी है। बुधवार को जारी किए गए मंथली सर्वे में ये जानकारी दी गई है।

मौसमी रूप से समायोजित एचएसबीसी इंडिया सर्विस बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स दिसंबर के 59.3 से घटकर जनवरी में 56.5 पर आ गया, जो नवंबर के बाद से इसका सबसे निचला स्तर है। क्रय प्रबंधक सूचकांक यानी पीएमआई की भाषा में 50 से ऊपर अंक का मतलब गतिविधियों में विस्तार से और 50 से कम का आशय संकुचन से होता है।

जनवरी में खोयी बढ़त

एचएसबीसी के भारत के मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा है कि भारत के सर्विस सेक्टर ने जनवरी में बढ़त की स्पीड खो दी, हालांकि पीएमआई 50 के स्तर से काफी ऊपर रहा। व्यावसायिक गतिविधि और नए व्यवसाय पीएमआई सूचकांक क्रमशः नवंबर 2022 और नवंबर 2023 के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर आ गए।

तेजी से बढ़त

कुल नए ऑर्डर के रुझान के विपरीत, अंतरराष्ट्रीय बिक्री में तेजी से वृद्धि हुई। सर्वेक्षण में शामिल लोगों ने एशिया, यूरोप, पश्चिम एशिया और अमेरिका के ग्राहकों से लाभ का उल्लेख किया। विस्तार की कुल दर पांच महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। भंडारी ने कहा है कि नए निर्यात कारोबार में आंशिक रूप से गिरावट रही, हालांकि 2024 के आखिरी में गिरावट से उबरना जारी रखा।

रोजगार सृजन की दर में तेजी

सर्वेक्षण में कहा गया कि नए व्यवसाय में निरंतर सुधार और बढ़ती क्षमता दबाव ने सर्विस प्रोवाइडर को पिछली वित्तीय तिमाही के प्रारंभ में अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती करने के लिए प्रेरित किया। पूर्णकालिक तथा अंशकालिक पदों पर नियुक्तियां की गईं। दिसंबर से रोजगार सृजन की दर में तेजी आई और यह दिसंबर 2005 में डेटा संग्रह शुरू होने के बाद से सबसे तेजी से बढ़ी।

मूल्य के मोर्चे पर, सेवा कंपनियों ने अपने खर्चों में एक और उछाल देखा, जिसकी मुख्य वजह कर्मचारियों की बढ़ती लागत के साथ खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें भी रहीं। बढ़ती लागत के बोझ व मांग के लचीलेपन के परिणामस्वरूप 2025 की शुरुआत में भारतीय सेवाओं के प्रावधान के लिए लगाए गए मूल्य और भी बढ़ गए।

इस बीच, भारत की निजी क्षेत्र की वृद्धि दर जनवरी में कुछ धीमी हुई। एचएसबीसी इंडिया कम्पोजिट आउटपुट सूचकांक दिसंबर के 59.2 से गिरकर 14 महीने के निचले स्तर 57.7 पर आ गया। समग्र पीएमआई सूचकांक तुलनीय विनिर्माण व सेवा पीएमआई सूचकांकों का भारित औसत है। एचएसबीसी इंडिया सेवा पीएमआई को एसएंडपी ग्लोबल ने करीब 400 सेवा क्षेत्र की कंपनियों के ग्रुप को भेजे गए सवालों के जवाबों के आधार पर तैयार किया है।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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