

नई दिल्ली: भारत ने चार चीनी प्रोडक्ट्स पर एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाने का फैसला किया है। इनमें एल्युमीनियम फॉइल, वैक्यूम फ्लास्क, सॉफ्ट फेराइट कोर्स और ट्राइक्लोरो आइसोसिनोरिक एसिड शामिल हैं। ये सभी सामान सामान्य से कम कीमत पर चीन से भारत को निर्यात किए गए थे। सरकार ने यह कदम घरेलू कंपनियों को सस्ते आयात से बचाने के लिए उठाया है। यह शुल्क पांच साल के लिए लगाया गया है। यह फैसला वाणिज्य मंत्रालय की जांच इकाई डीजीटीआर की सिफारिश के बाद लिया गया।
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड, राजस्व विभाग ने अलग-अलग अधिसूचनाओं में इसकी जानकारी दी है। सरकार ने चीन से इंपोर्ट हुए एल्युमीनियम फॉयल पर डंपिंग रोधी शुल्क लगाया गया है, जो कि अस्थायी है। इसे छह महीने के लिए लगाया गया है। एल्युमीनियम फॉयल पर 873 डॉलर प्रति टन तक का एंटी-डंपिंग शुल्क लगाया गया है।
इसी के साथ सरकार ने चीन और जापान से एसिड के आयात पर भी 276 डॉलर प्रति टन से लेकर 986 डॉलर प्रति टन तक का शुल्क लगाया है। गौरतलब है कि दुनिया के तमाम देशों के बीच आयात-निर्यात का कारोबार होता है। समय-समय पर सरकार व्यापार को संतुलन करने के लिए इस तरह के फैसले लेती है। जैसे कि अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की सरकार रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने जा रही है।
आपको बता दें कि जब भी कोई देश अपने प्रोडक्ट को कम कीमत पर दूसरे देश को एक्सपोर्ट करता है, तो उसे डंपिंग किया जाता है। अब जिस देश में डंपिंग किया जा रहा है वहां बनने वाले प्रोडक्ट्स पर इसका असर पड़ता है। इससे घरेलू बाजार में निर्यात वाले प्रोडक्ट की कीमत कम हो जाती है और इसका असर घरेलू ब्रांड की बिक्री पर पड़ता है। बिजनेस सेक्टर की अन्य खबरों के लिए यहां क्लिक करें
ऐसा इसलिए क्योंकि सस्ते विदेशी प्रोडक्ट्स के मुकाबले घरेलू कंपनियां लागत अधिक होने के चलते अपने प्रोडक्ट को इतनी कीमत पर नहीं बेच पाएंगी। इससे इनकी डिमांड कम हो जाएगी। इसके चलते कई कंपनियां बंद हो जाती हैं। कई लोगों की नौकरी चली जाती है। सरकार घरेलू व्यवसायों के हितों और देश की अर्थव्यवस्था का ध्यान रखते हुए एंटी डंपिंग शुल्क लगाती है।