64 साल बाद बदल जाएगा इनकम टैक्स एक्ट का नाम, बदलकर हो जाएगा ये नाम

इस कानून के लोकसभा से पारित होने के 64 साल पुराने वर्तमान इनकम टैक्स का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। बता दें कि वर्तमान में इनकम टैक्स एक्ट 1964 का है, जिसमें टाइम की डिमांड के अनुसार, बार-बार संसोधन किया जाता हैं।
इस कानून के लोकसभा से पारित होने के 64 साल पुराने वर्तमान इनकम टैक्स का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। बता दें कि वर्तमान में इनकम टैक्स एक्ट 1964 का है, जिसमें टाइम की डिमांड के अनुसार, बार-बार संसोधन किया जाता हैं।
इनकम टैक्स (सौजन्य : सोशल मीडिया )
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नई दिल्ली : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जल्द ही बड़े टैक्स रिफॉर्म के लिए अगले हफ्ते नया टैक्स बिल लेकर आने का ऐलान करने वाली है। इसकी चर्चा पिछले काफी दिनों से हो रही थी। कानून मंत्रालय इसका ड्राफ्ट तैयार कर रहा था। मिली जानकारी के अनुसार, नया टैक्स बिल पुराने कानून में संशोधन नहीं बल्कि पूरी तरीके से कानून का नया ड्राफ्ट होने वाला है। जिसमें देश की आम जनता की सामान्य परेशानियों को हल करने की कोशिश की जाएगी।

इस कानून के लोकसभा से पारित होने के 64 साल पुराने वर्तमान इनकम टैक्स का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। बता दें कि वर्तमान में इनकम टैक्स एक्ट 1964 का है, जिसमें टाइम की डिमांड के अनुसार, बार-बार संसोधन किया जाता हैं। इस कानून का मूल ढांचा अभी भी बरकरार है। हालांकि इसके बाकी स्वरुपों में कुछ हद तक बदलाव हो चुका है। इससे पहले भारत सरकार आपराधिक कानूनों को पूरी तरह से बदलकर और उन्हें मूल हिंदी नाम भारत न्याय संहिता देकर बड़ा कदम उठा चुकी है।

कर संहिता

जानकारों के अनुसार माना जा रहा है कि ये कानून अंग्रेजों के द्वारा दिए गए नामों को भारतीय नामों की पहल में भारत सरकार नए टैक्स बिल के लागू होने के बाद इसका नाम इनकम टैक्स एक्ट से बदलकर कर संहिता किया जा सकता है। नए कानून में सबसे ज्यादा जोर इसे देश की आम जनता को समझने में आसान बनाने पर है, ताकि लोगों को अपना टैक्सेबल इनकम समझने और उसमें छूट का नुस्खा ढूढ़ने के लिए चार्टर्ड एकाउंटेंट, टैक्सेशन लॉयर या कंपनी सेक्रेटरी से आग्रह नहीं करना पड़ेगा। ये कानून समझने में इतना आसान होगा कि सामान्य पढ़ा लिखा और औसत ज्ञान वाला व्यक्ति भी इसके माध्यम से अपना टैक्सेबल इनकम आसानी से कैलक्यूलेट कर ले। इसमें कई तरह के डिडक्शन और एक्जंपशन से भी राहत मिलने की उम्मीद की जा रही है। कई तरह के डिडक्शन और एक्जंप्शन को खत्म कर उसमें एक या दो तरह के डिडक्शन या एक्जंप्शन के रहने देने की उम्मीद जतायी जा रही है।

पहले विश्वास करें फिर जांच करें

जानकारों की मानें तो नए टैक्स बिल का आधार न्यू टैक्स रिजीम हो सकता है। इसमें भी डिडक्शन और एक्जंप्शन की भरमार नहीं होगी। न्यू इनकम टैक्स एक्ट पुराने की तरह मोटा भी नहीं होगा। इस कानून के प्रावधानों को कम कर इसके पन्ने 60 प्रतिशत तक कम किए जा सकते हैं। इसके शब्दों को समझने में आसान और सीधा बनाया जाएगा। बिजनेस की अन्य खबरें पढ़ने के लिए यहां पर क्लिक करें

पहले विश्वास करो, फिर जांच करो होगा मूल मंत्र

जानकारों का यह भी मानना है कि नए टैक्स बिल का बेस न्यू टैक्स रिजीम हो सकता है. इसमें भी एक्जंप्शन और डिडक्शन की भरमार नहीं है. नया इनकम टैक्स कानून पुराने की तरह मोटा भी नहीं होगा. प्रावधानों को कम कर इसके पन्ने 60 फीसदी तक कम किए जा सकते हैं. इसके शब्द समझने में सीधे और लहजे में सपाट होंगे. इसके लागू होने के बाद टैक्स निकालना और उसे फाइल करना भी आसान होगा. नए इनकम टैक्स कानून का मूलमंत्र पहले विश्वास करो, फिर जांच करो होगा. आयकर अधिकारियों को इसके जरिए सीधी गाइडलाइन दी जाएगी कि वे टैक्स पेयर्स पर अधिक से अधिक विश्वास करें. उन्हें जानबूझकर परेशान नहीं करें. ग़ड़बड़ी के पुख्ता सबूत मिलने पर ही किसी तरह की जांच की पहल करें.

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