पेट्रोल और डीजल पर टैक्स लगाकर केंद्र और राज्य सरकारें भर रही हैं सरकारी खजाना

राज्यसभा में होने वाले प्रश्नकाल में कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने पेट्रोलियम मंत्रालय ने सवाल करते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय से मई 2019 के बाद से पेट्रोल डीजल पर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी, दूसरे टैक्स और सेस लगाकर वसूले गए रेवेन्यू की जानकारी के बारे में प्रश्न खड़ा किया था।
Petrol and diesel will become cheaper
पेट्रोल और डीजल (सौजन्य : सोशल मीडिया)
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नई दिल्ली: इंटरनेशनल मार्केट में पिछले 5 सालों से कच्चे तेल के दामों में भले ही गिरावट आ गयी हो, लेकिन आम लोगों को महंगे पेट्रोल और डीजल की कीमतों से कोई राहत नहीं मिली है। इन 5 सालों में केंद्र और राज्य सरकारों ने पेट्रोल और डीजल पर टैक्स लगाकर करोड़ों रुपयों की कमाई जरूर कर ली है। संसद में प्रश्नकाल में पूछे गए सवालों के जवाबों में ये जानकारी मिली है। वित्त वर्ष 2019-20 के बाद से मौजूदा वित्त वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही के अप्रैल और जून महीने तक पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले टैक्स के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकारों के तकरीबन 36.58 लाख करोड़ रुपये की कमाई से सरकारी खजाना भर लिया है।

राज्यसभा में होने वाले प्रश्नकाल में कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने पेट्रोलियम मंत्रालय ने सवाल करते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय से मई 2019 के बाद से पेट्रोल डीजल पर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी, दूसरे टैक्स और सेस लगाकर वसूले गए रेवेन्यू की जानकारी के बारे में प्रश्न खड़ा किया था। इस सवाल के लिखित जवाब के रुप में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने जानकारी देते हुए बताया है कि आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2019-20 से लेकर वित्त वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही अप्रैल - जून तक केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर 36,58,354 करोड़ की कमाई की हैं। जबकि पिछले 5 वित्त वर्ष 2019-20 से लेकर 2023-24 के दौरान केंद्र और राज्य सरकार ने टैक्स के माध्यम से 35 लाख करोड़ रुपये कमाएं हैं।

60 प्रतिशत टैक्स केंद्र सरकार के पास

पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले टैक्स के कारण केंद्र और राज्य सरकार ने करीब 36,58,354 करोड़ रुपये की कमाई की है। जिसमें से अकेले केंद्र सरकार के पास के सरकारी खजाने में 22,21,340 करोड़ रुपये जमा हुए है। जबकि राज्य सरकारों ने पेट्रोल और डीजल पर वैट लगाकर 14,37,015 लाख करोड़ रुपये की कमाई की है। जिसका सीधा मतलब ये है कि पेट्रोल-डीजल पर 5 वित्त वर्षों में टैक्स लगाकर 36.58 लाख करोड़ रुपये वसूले हैं, जिसमें से 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार का और 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार का रहा है।

केंद्र और राज्य सरकार भर रही खजाना

फिलहाल देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर के दाम पर मिल रहा है, जिसमें एक्साइज ड्यूटी और वैट को छोड़कर डीलर्स को 55.08 रुपये प्रति लीटर में पेट्रोल उपलब्ध करवाया जा रहा है। हालांकि इसमें एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और वैट की हिस्सेदारी 39.69 रुपये की होती है।

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