

नीरज से अदावत अनंत के पड़ा भारी
अनंत का पार्टी से बगावत हुए 6 साल के लिए निष्कासित
नीतीश कुमार को लेकर दिया गया विवादित बयान अनंत के लिए बना मुसीबत
Why Did JDU Expel Anant Singh From The party For 6 years?: सियासत में न कोई हमेशा अपना होता है, न कोई हमेशा पराया, वक्त बदलते ही बदल जाता है रिश्तों और वफादारियों का साया। ये कहावत बिहार की राजनीति में सटीक बैठ रही है। मोकामा के विधायक और छोटे सरकार के नाम से रील की दुनियां में अपने बेबाक बयानों के कारण छाए रहने वाले अनंत सिंह ने कभी नहीं सोचा होगा कि नीरज कुमार से दुश्मनी का खामियाजा पार्टी से निष्कासन के रूप में भुगतना पड़ेगा।
पार्टी ने अनंत के साथ-साथ उनकी पत्नी को भी बाहर का रास्ता दिखाया है। इतना ही नहीं विधानसभा की सदस्यता खत्म करने लिए जदयू ने स्पीकर को पत्र भी लिख दिया है। आखिर जदयू को अपने ही विधायक के खिलाफ इतना बड़ा कदम क्यों उठाना पड़ा? इसके पीछे की पूरी गणित को यहां समझें।
अनंत सिंह और जदयू के वरिष्ठ नेता नीरज कुमार के बीच विवाद नया नहीं है। दोनों के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता लंबे समय से चली आ रही है। वर्ष 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान दोनों के बीच टकराव खुलकर सामने आया था। उस समय जदयू ने मोकामा सीट से नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया, जबकि अनंत सिंह ने निर्दलीय चुनाव लड़कर जीत दर्ज की थी।
इसके बाद भी दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक मतभेद खत्म नहीं हुए। अनंत सिंह का आरोप रहा है कि नीरज कुमार ने उनके राजनीतिक सफर में लगातार उनका विरोध किया। दूसरी ओर, नीरज कुमार भी अनंत सिंह की राजनीति और उनके अतीत को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। यही पुरानी प्रतिद्वंद्विता आगे चलकर जदयू के भीतर बड़े विवाद की वजह बनी।
इस पूरे विवाद में सबसे निर्णायक मोड़ बिहार विधान परिषद की पटना स्नातक सीट का चुनाव बना। जदयू ने इस सीट से अपने वरिष्ठ नेता नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया था। लेकिन अनंत सिंह ने उनके समर्थन में प्रचार करने के बजाय जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज सिंह का समर्थन किया। बीते दिनों मीडिया के सामने अनंत सिंह ने खुलकर कहा अनुज ही हमारा नेता है।
अनंत सिंह ने सार्वजनिक रूप से नीरज कुमार के खिलाफ अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने तर्क दिया कि नीरज कुमार ने पहले भी उनके और अन्य नेताओं के चुनावों में उनका विरोध किया था। इसलिए वह इस बार उनका समर्थन नहीं करेंगे।
अनंत सिंह का यह रुख जदयू नेतृत्व के लिए असहज स्थिति पैदा करने वाला था। पार्टी के विधायक का अपने ही दल के उम्मीदवार के खिलाफ दूसरे दल के प्रत्याशी का समर्थन करना अनुशासन का गंभीर मामला बन गया। यही वजह रही कि विधान परिषद चुनाव में सामने आई यह बगावत निष्कासन की प्रमुख वजहों में शामिल हुई।
विवाद केवल चुनावी समर्थन तक सीमित नहीं रहा। बीते दिनों अनंत सिंह के एक बयान ने भी राजनीतिक हलचल बढ़ा दी। उन्होंने नीतीश कुमार के साथ अपने पुराने राजनीतिक संबंधों का जिक्र करते हुए नौ लोगों की हत्या करवाने से संबंधित दावा किया था।
इस बयान के बाद जदयू ने उनसे दूरी बनाई। हालांकि, अनंत सिंह ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि उनका आशय यह था कि लालू प्रसाद यादव के शासनकाल में उनके नौ सहयोगियों की हत्या हुई थी और उन्होंने स्वयं भी नुकसान उठाया था। इसलिए उनके शुरुआती बयान को लेकर विवाद हुआ और बाद में उन्होंने उसका अर्थ स्पष्ट करने की कोशिश की।
24 अक्टूबर को जदयू की बिहार इकाई के अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा की ओर से जारी निर्णय के तहत अनंत सिंह की प्राथमिक सदस्यता समाप्त कर उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। उनकी पत्नी नीलम देवी को भी छह साल के लिए पार्टी से बाहर किया गया।
पार्टी ने अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता के संबंध में बिहार विधानसभा अध्यक्ष से संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत कार्रवाई शुरू करने का अनुरोध भी किया है।
इस घटनाक्रम को जदयू के भीतर पार्टी अनुशासन और नेतृत्व के फैसलों को चुनौती देने के खिलाफ कड़े कदम के रूप में देखा जा सकता है। अनंत सिंह का मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह मोकामा से विधायक हैं और उनकी अपनी राजनीतिक पहचान है। इसके बावजूद पार्टी ने आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ उनके रुख और अन्य कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों को गंभीरता से लिया। पार्टी ने साफ संदेश दिया है कि पार्टी मर्यादा से चलती है। कोई बयान देने से पहले उसपर विचार करें अन्यथा पार्टी आपके खिलाफ एक्शन लेने में थोड़ा भी संकोच नहीं करेगी।
एमएलसी चुनाव में जिस तरीके अनंत सिंह ने पार्टी से बगावत करते हुए जनसुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह का समर्थन दिया और कई बार खुलकर कहा कि अनुज ही हमारा नेता है। इस बयान को लेकर अब लोगों में चर्चा है कि क्या अनंत सिंह जनसुराज का दामन थाम सकते हैं? इसको लेकर अनंत सिंह ने अभी कोई टिप्पणी नहीं की है। अब देखना होगा आगे क्या होता है। फिलहाल बिहार की राजनीति में अनंत और नीरज की दुश्मनी के बाद अनंत पर की गई कार्रवाई ने जदयू में नीरज के कद और बढ़ा दिया है। पार्टी ने साफ संदेश दिया है कि पार्टी से बगावत का दुष्परिणाम किसी भी बाहुबली को भुगतना पड़ सकता है।