

PUC Certificate Rules: राजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को काबू में करने के लिए सरकार ने सख्त कदम उठाया है। अब अगर किसी वाहन के पास वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट नहीं है, तो उसे पेट्रोल, डीजल, CNG या LPG नहीं दिया जाएगा। यानी अब फ्यूल भरवाने से पहले PUC दिखाना अनिवार्य होगा। यह नियम स्थायी तौर पर लागू किया जा रहा है ताकि प्रदूषण पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार का लक्ष्य दिल्ली को साफ और स्वस्थ बनाना है। उन्होंने माना कि वायु प्रदूषण अब गंभीर समस्या बन चुका है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसी को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के तहत हर वाहन मालिक के लिए PUC Certificate रखना जरूरी है।
वाहन के रजिस्ट्रेशन के एक साल बाद PUC सर्टिफिकेट बनवाना अनिवार्य हो जाता है। यह सर्टिफिकेट आमतौर पर एक साल तक वैध रहता है। इसके बावजूद कई लोग इसे नजरअंदाज करते हैं और बिना PUC के वाहन चलाते हैं, जिससे प्रदूषण बढ़ता है।
नए नियम के तहत दिल्ली के सभी पेट्रोल पंप और गैस स्टेशन पर सख्ती से जांच होगी। केवल उन्हीं वाहनों को ईंधन मिलेगा, जिनके पास वैध PUC सर्टिफिकेट होगा। सरकार ने सभी ईंधन कंपनियों को इस नियम का पालन करने के निर्देश दिए हैं। "बिना PUC Certificate के अब किसी भी वाहन को ईंधन नहीं दिया जाएगा।"
इस नियम को लागू कराने के लिए परिवहन विभाग, नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस को जिम्मेदारी दी गई है। अगर कोई वाहन नियम तोड़ता पाया गया, तो उसके खिलाफ चालान, वाहन जब्ती और भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
सरकार सिर्फ नियम लागू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि कई स्तरों पर काम कर रही है। वाहनों से निकलने वाले धुएं को नियंत्रित करना इस योजना का अहम हिस्सा है। इसके अलावा GRAP के तहत भी प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर सख्ती बढ़ाई जा रही है।
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे समय-समय पर अपने वाहन का PUC सर्टिफिकेट बनवाएं और नियमों का पालन करें। "अगर सभी लोग जिम्मेदारी निभाएं, तो दिल्ली की हवा को साफ बनाया जा सकता है।"
यह फैसला मिडिल क्लास वाहन चालकों के लिए जरूरी चेतावनी है। अब छोटी सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है। समय रहते PUC बनवाना ही समझदारी है, वरना गाड़ी में पेट्रोल नहीं, सिर्फ परेशानी मिलेगी।