गाड़ी चलाने से पहले जान लें Third Party Insurance, नहीं तो पड़ सकता है भारी

Car Insurance: कार, बाइक चलाते हैं, तो थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस को समझना बहुत ज़रूरी है। थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस, या बस एक्ट-ओनली इंश्योरेंस, भारत में सड़क पर कोई भी गाड़ी चलाने के लिए कानूनी तौर पर है।
Know about Third Party Insurance before driving, otherwise it may prove costly.
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Third Party Insurance Rules: अगर आप कार या बाइक चलाते हैं, तो थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस को समझना बहुत ज़रूरी है। थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस, या बस एक्ट-ओनली इंश्योरेंस, भारत में सड़क पर कोई भी गाड़ी चलाने के लिए कानूनी तौर पर ज़रूरी है।

बहुत से लोग इंश्योरेंस खरीदते हैं, लेकिन उन्हें फर्स्ट-पार्टी, सेकंड-पार्टी और थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस का मतलब नहीं पता होता। इन शब्दों को समझना बहुत ज़रूरी है क्योंकि इससे आपको यह समझने में मदद मिलती है कि एक्सीडेंट होने पर किसे कवर किया जाएगा।

फर्स्ट, सेकेंड और थर्ड पार्टी का क्या मतलब है

जब इंश्योरेंस की बात आती है, तो तीन पार्टी होती हैं।

  • फर्स्ट पार्टी: वह व्यक्ति जो इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदता है, यानी गाड़ी का मालिक।
  • सेकंड पार्टी: वह कंपनी जो इंश्योरेंस पॉलिसी जारी करती है, यानी इंश्योरेंस कंपनी।
  • थर्ड पार्टी: वह व्यक्ति या प्रॉपर्टी जिसे आपकी गाड़ी से हुए एक्सीडेंट में नुकसान होता है।

यानी, अगर आपकी गाड़ी किसी दूसरे व्यक्ति को घायल करती है या उनकी प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाती है, तो थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस उन्हें मुआवजा देता है।

कानूनी रूप से क्यों जरूरी है यह इंश्योरेंस

भारत में मोटर व्हीकल एक्ट के तहत, हर गाड़ी मालिक के लिए थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस होना ज़रूरी है। इस इंश्योरेंस के बिना गाड़ी चलाने पर भारी जुर्माना लग सकता है। कई मामलों में, गाड़ी ज़ब्त भी की जा सकती है।

थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के मुख्य फ़ायदे

1. फ़ाइनेंशियल सिक्योरिटी

अगर आपकी गाड़ी किसी दूसरे व्यक्ति को घायल करती है या उनकी प्रॉपर्टी को नुकसान पहुँचाती है, तो इंश्योरेंस कंपनी उन्हें मुआवज़ा देगी। इससे आपकी जेब से होने वाले काफ़ी खर्चे बच जाते हैं।

2. कम प्रीमियम पर सुरक्षा

थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस प्रीमियम आम तौर पर काफ़ी सस्ते होते हैं। यह कम कीमत पर कानूनी सुरक्षा और फ़ाइनेंशियल सिक्योरिटी दोनों देता है।

3. एक्सीडेंट में मदद

इंश्योरेंस कंपनी एक्सीडेंट होने पर थर्ड-पार्टी लोगों को मुआवज़ा देती है, जिससे गाड़ी मालिक पर फ़ाइनेंशियल दबाव कम होता है।

इन मामलों में नहीं मिलता इंश्योरेंस का पैसा

बहुत से लोग सोचते हैं कि पॉलिसी होने से हर स्थिति में कवरेज मिलेगा, लेकिन यह सच नहीं है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इंश्योरेंस कंपनी कुछ खास हालात में क्लेम देने से मना कर सकती है, जैसे:

  • अगर ड्राइवर नशे में गाड़ी चला रहा हो
  • अगर कोई नाबालिग गाड़ी चला रहा हो
  • अगर ड्राइवर के पास वैलिड ड्राइविंग लाइसेंस न हो
  • इन मामलों में, इंश्योरेंस कंपनी एक्सीडेंट होने पर क्लेम देने से मना कर सकती है।

एक ज़रूरी बात जो लोग अक्सर नहीं जानते:

अगर आप थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस खरीद रहे हैं, तो यह जानना ज़रूरी है कि यह पॉलिसी आपकी अपनी गाड़ी को कवर नहीं करती है। इसका मुख्य मकसद एक्सीडेंट में शामिल थर्ड पार्टी या उनकी प्रॉपर्टी को बचाना है। अगर आप अपनी गाड़ी को हुए नुकसान को भी कवर करना चाहते हैं, तो आपको कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस खरीदना होगा।

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