Ford Mustang: 61 साल पहले लॉन्च हुई ये कार आज भी युवाओं की पहली पसंद, जानिए इसका दिलचस्प इतिहास

एक ऐसी कार लॉन्च की, जिसने उस दौर के युवाओं — यानी बेबी बूमर्स — को अपना दीवाना बना लिया। इस कार का नाम था Ford Mustang। दिलजीत दोसांझ के पॉपुलर गाने ‘Do You Know’ में भी इसका जिक्र इस कार की पॉपुलैरिटी को बयां करता है।
Ford Mustang
Ford Mustang में क्या है खास। (सौ. Ford)
Updated on

नवभारत ऑटोमोबाइल डेस्क: आज की युवा पीढ़ी को लग्जरी कारों में घूमना और कॉलेज में उसका टशन दिखाना जितना पसंद है, उतना ही क्रेज 61 साल पहले की जेनरेशन में भी देखने को मिला था। 17 अप्रैल 1964 को Ford Motors ने एक ऐसी कार लॉन्च की, जिसने उस दौर के युवाओं — यानी बेबी बूमर्स — को अपना दीवाना बना लिया। इस कार का नाम था Ford Mustang। दिलजीत दोसांझ के पॉपुलर गाने ‘Do You Know’ में भी इसका जिक्र इस कार की पॉपुलैरिटी को बयां करता है।

Ford Mustang: एक आइकॉनिक शुरुआत

1964 में Ford की फैक्ट्री से निकली मस्टैंग आज अपनी 7वीं पीढ़ी के मॉडल के साथ दुनियाभर में छाई हुई है। ये फोर्ड की सबसे लंबे समय तक चलने वाली कारों में शुमार है। उस दौर में कॉलेज स्टूडेंट्स के बीच यह कार स्टाइल स्टेटमेंट बन गई थी।

क्यों बनी मस्टैंग?

1960 का दशक दुनिया के लिए बदलाव का दौर था। अमेरिका में शिक्षा स्तर बढ़ रहा था, एक नया मिडिल क्लास उभर रहा था। कॉलेज पढ़े युवाओं में महंगे प्रोडक्ट्स खरीदने का चलन बढ़ रहा था। फोर्ड ने इस बदलते बाजार को पहचाना और युवाओं के लिए एक ऐसी कार बनाने का फैसला लिया, जो स्टाइलिश, स्पोर्टी और अफोर्डेबल हो।

Ford Mustang का डिज़ाइन: युवाओं के लिए खास

फोर्ड ने कार लॉन्च से पहले 8 शहरों के कॉलेजों में रिसर्च की। पता चला कि ‘बकेट सीट’ युवाओं के लिए डेटिंग के लिहाज से परफेक्ट है। 42% छात्रों ने इसका समर्थन किया। इसके बाद कंपनी ने तीन तरह की सीट डिज़ाइन तैयार कीं, ताकि युवाओं और फैमिली दोनों के लिए कार को उपयुक्त बनाया जा सके। ऑटोमोबाइल से जुड़ी अन्य खबरों के लिए यहां क्लिक करें

स्टाइल स्टेटमेंट से कलेक्टर्स आइटम बनी मस्टैंग

धीरे-धीरे मस्टैंग शादी, डेटिंग और युवाओं की पहली कार का पर्याय बन गई। ‘जस्ट मैरिड’ की पट्टी के साथ खुली कार में घूमना ट्रेंड बन गया। आज पुराने मॉडल्स की कीमत नए मॉडल्स से कहीं ज्यादा है, और यह कार ऑटोमोबाइल कलेक्टर्स के लिए एक बेशकीमती खजाना बन चुकी है।

Navbharat Live
navbharatlive.com