

अगर आपने हाल ही में इलेक्ट्रिक कार खरीदी है और कम स्पीड पर चलते समय उससे हल्की "गुनगुनाहट" जैसी आवाज सुनी है, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। यह किसी तकनीकी खराबी का संकेत नहीं, बल्कि आपकी और दूसरों की सुरक्षा के लिए लगाया गया एक खास फीचर है। इस सिस्टम को AVAS यानी Acoustic Vehicle Alerting System कहा जाता है।
इलेक्ट्रिक गाड़ियां पेट्रोल और डीजल वाहनों के मुकाबले बेहद शांत चलती हैं। यही उनकी बड़ी खूबी है, लेकिन कई बार यही सन्नाटा खतरे की वजह बन सकता है। जब गाड़ी से इंजन की आवाज नहीं आती, तो पैदल चलने वाले, बुजुर्ग, बच्चे या साइकिल सवार लोग उसकी मौजूदगी का अंदाजा नहीं लगा पाते। खासतौर पर भीड़भाड़ वाले शहरों में यह स्थिति दुर्घटना को जन्म दे सकती है।
इसी समस्या के समाधान के लिए AVAS सिस्टम विकसित किया गया है। यह सिस्टम आमतौर पर 20 किमी प्रति घंटा से कम स्पीड पर गाड़ी चलने के दौरान हल्की लेकिन साफ सुनाई देने वाली आवाज पैदा करता है। यह आवाज इतनी तेज नहीं होती कि आसपास के लोगों को असहज करे, लेकिन इतनी जरूर होती है कि पैदल यात्रियों को वाहन के आने का संकेत मिल सके। जैसे ही कार की स्पीड बढ़ती है, टायर और हवा की प्राकृतिक आवाज पर्याप्त हो जाती है, इसलिए AVAS की जरूरत कम हो जाती है।
दुनिया के कई देशों में इलेक्ट्रिक वाहनों में AVAS सिस्टम लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। भारत में भी ऑटो कंपनियां अपने ईवी मॉडल्स में यह फीचर दे रही हैं। टाटा मोटर्स जैसी कंपनियां अपने इलेक्ट्रिक वाहनों में अलग-अलग साउंड सिग्नेचर का उपयोग करती हैं, ताकि हर मॉडल की पहचान अलग हो। सिर्फ पूरी तरह इलेक्ट्रिक कारें ही नहीं, बल्कि स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वाहन भी जब इलेक्ट्रिक मोड में कम स्पीड पर चलते हैं, तो वे भी ऐसी हल्की चेतावनी ध्वनि उत्पन्न करते हैं।
कुछ लग्जरी ब्रांड अपने इलेक्ट्रिक मॉडलों के लिए विशेष साउंड डिजाइन तैयार करवाते हैं। कार की स्पीड बढ़ने या घटने के साथ आवाज का टोन भी बदलता है, जिससे ड्राइवर को बेहतर और आधुनिक ड्राइविंग अनुभव मिलता है।
कुल मिलाकर, AVAS केवल एक औपचारिक नियम नहीं है, बल्कि सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। यह फीचर खासकर भीड़भाड़ वाले इलाकों में पैदल यात्रियों और ड्राइवर दोनों के लिए सुरक्षा कवच का काम करता है।