

Ethanol Blended Petrol: देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर बहस तेजी से बढ़ती जा रही है। वहीं सोशल मीडिया पर कई वाहन मालिक दावा कर रहे हैं कि 20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल इस्तेमाल करने के बाद उनकी कार का माइलेज कम हो गया है और कुछ लोगों ने गाड़ी की परफॉर्मेंस पर भी सवाल उठाए हैं। इसके साथ ही दूसरी ओर सरकार और वाहन निर्माता कंपनियां लगातार कह रही हैं कि E20 पेट्रोल से वाहनों को कोई नुकसान नहीं होता। लेकिन केंद्र सरकार ने यह जरूर माना है कि कुछ वाहनों में माइलेज 3% से 5% तक कम हो सकता है पर इसका असर हर वाहन पर एक जैसा नहीं होता।
इस मामले पर केंद्र सरकार ने बताया है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कुछ वाहनों में ईंधन की खपत थोड़ी बढ़ सकती है। इसके बावजूद सरकार का कहना है कि इसके फायदे कहीं अधिक हैं। बताया जा रहा है कि E20 से इंजन की कार्यक्षमता बेहतर हो सकती है, वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण में कमी आती है और भारत की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता भी घटती है। यही वजह है कि देश धीरे-धीरे एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल की ओर बढ़ रहा है।
मान लीजिए आप अपनी कार रोजाना 50 किलोमीटर चलाते हैं। इस हिसाब से सालभर में कुल दूरी 18,250 किलोमीटर होगी। यदि आपकी कार पहले 20 kmpl का माइलेज देती थी तो आपको लगभग 913 लीटर पेट्रोल की जरूरत पड़ती। वहीं अब अगर E20 पेट्रोल के कारण माइलेज 5% घटकर 19 kmpl रह जाए तो उसी दूरी के लिए करीब 961 लीटर पेट्रोल लगेगा। यानी पूरे साल में लगभग 48 लीटर अतिरिक्त पेट्रोल की जरूरत होगी। अगर पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर मानी जाए तो आपका अतिरिक्त खर्च करीब 4,800 रुपये तक पहुंच सकता है। जिन शहरों में पेट्रोल इससे महंगा है वहां यह राशि और भी अधिक हो सकती है।
जानकारी के लिए बता दें कि ऑटो एक्सपर्ट्स का कहना है कि माइलेज केवल ईंधन पर निर्भर नहीं करता। वाहन की उम्र, इंजन की स्थिति, ट्रैफिक, टायर प्रेशर, एयर कंडीशनर का इस्तेमाल और ड्राइविंग स्टाइल भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए माइलेज में कमी का पूरा जिम्मेदार केवल E20 पेट्रोल को मानना सही नहीं होगा।
नवभारत का डिस्क्लेमर: यह गणना केवल समझाने के उद्देश्य से 5% माइलेज घटने के उदाहरण पर आधारित है। सरकार के अनुसार E20 का प्रभाव सभी वाहनों पर समान नहीं होता और वास्तविक माइलेज वाहन व उपयोग की परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।