

नवभारत ऑटोमोबाइल डेस्क : भारतीय सेना ने अपनी ताकत में और इजाफा करते हुए देश में निर्मित अत्याधुनिक बख्तरबंद वाहनों को बेड़े में शामिल कर लिया है। रक्षा मंत्रालय ने महिंद्रा डिफेंस सिस्टम्स के साथ ₹1,056 करोड़ का करार किया है, जिसके तहत सेना को अगले चार वर्षों में 1,300 'आर्मर्ड लाइट स्पेशलिस्ट व्हीकल' (ALSV) मिलेंगे। यह करार 'मेक इन इंडिया' अभियान के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
महिंद्रा ALSV को बी7 स्तर तक बैलिस्टिक सुरक्षा मिली है और यह 3.2 लीटर मल्टी-फ्यूल डीजल इंजन से लैस है, जो 215hp पावर और 500Nm टॉर्क पैदा करता है। इसकी गति 120 किमी प्रति घंटा से अधिक है और यह 0 से 60 किमी/घंटा की रफ्तार मात्र 12 सेकंड में पकड़ सकता है। यह वाहन माध्यम मशीन गन, ऑटोमैटिक ग्रेनेड लॉन्चर और एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों को ले जाने में सक्षम है। 4x4 ड्राइव सिस्टम, हाई ट्रैवल ऑल-व्हील सस्पेंशन और रन-फ्लैट टायर्स के चलते यह ऊबड़-खाबड़ इलाकों में भी बेहतरीन प्रदर्शन करता है।
कल्याणी M4, जिसे साउथ अफ्रीकी 'पैरामाउंट ग्रुप' के साथ मिलकर बनाया गया है, विशेष रूप से ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में सैनिकों को सुरक्षित ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है। ₹177.95 करोड़ के इस आपातकालीन ऑर्डर के तहत आए M4 में 465hp का दमदार इंजन है, जो 1627Nm टॉर्क देता है। इसकी गति 140 किमी/घंटा तक जाती है और एक बार ईंधन भरने पर 800 किमी तक सफर तय कर सकता है।
टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स का APC 4x4 भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों के लिए क्रांतिकारी साबित हो रहा है। 14 किलो और 21 किलो ब्लास्ट प्रोटेक्शन क्षमता के साथ यह वाहन सैनिकों को उच्चतम सुरक्षा प्रदान करता है। इसमें 14 सैनिकों के बैठने की व्यवस्था है और इसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में व्यापक परीक्षणों के बाद सेवा में शामिल किया गया है।
दक्षिण अफ्रीका में विकसित कैस्पिर वाहन अब भारतीय सेना का भी अभिन्न हिस्सा बन चुका है। कश्मीर जैसे आतंक प्रभावित क्षेत्रों में कैस्पिर का उपयोग सैनिकों को सुरक्षित परिवहन और दंगा नियंत्रण के लिए किया जा रहा है। 14 किलोग्राम टीएनटी विस्फोट सहन करने में सक्षम यह वाहन खतरनाक इलाकों में भी सैनिकों की जान बचाने में अव्वल साबित हो रहा है।
इन अत्याधुनिक बख्तरबंद वाहनों के शामिल होने से भारतीय सेना को आतंकवाद विरोधी अभियानों, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सैनिकों के सुरक्षित आवागमन, त्वरित कार्रवाई, विस्फोट सुरक्षा और सीमावर्ती इलाकों में बेहतर गश्त के लिए जबरदस्त बढ़त मिलेगी। यह नए युग की सैन्य रणनीति को मजबूती देने वाला कदम है, जो आने वाले वर्षों में भारत की सैन्य शक्ति को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।