

Mahindra Scorpio-N Facelift हुई लॉन्च, कीमत ने चौंकाया, पैनोरमिक सनरूफ से ADAS तक मिले कई प्रीमियम फीचर्स
V2V Communication For Road Safety: सोच के देखिए कि आपकी कार किसी मोड़ के पीछे छिपे खतरे या आगे चल रहे वाहन के अचानक ब्रेक लगाने की जानकारी पहले ही आपको दे दे। यह किसी साइंस फिक्शन फिल्म की कहानी नहीं बल्कि भारत में जल्द हकीकत बन सकती है। बता दें कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) एक नई Vehicle-to-Vehicle (V2V) कम्युनिकेशन तकनीक पर काम कर रहा है जिसके जरिए वाहन आपस में रियल-टाइम डेटा साझा करेंगे। इसका मकसद सड़क हादसों को कम करना और ड्राइविंग को पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित बनाना है।
जानकारी में सामने आया है कि सरकार ने इस तकनीक को लागू करने के लिए चरणबद्ध ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। जिसमें प्रस्ताव के अनुसार 1 अक्टूबर 2027 से बनने वाले L, M और N श्रेणी के वाहनों में यदि V2V सिस्टम लगाया जाता है तो उसे AIS-230 मानक का पालन करना होगा। इसके बाद 1 अक्टूबर 2028 से इन श्रेणियों के सभी नए वाहनों में V2V कम्युनिकेशन सिस्टम अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा गया है। लेकिन अभी यह अंतिम फैसला नहीं है और सरकार ने इस पर विशेषज्ञों व आम लोगों से 30 दिनों के भीतर सुझाव मांगे हैं।
V2V तकनीक के बारे में बताया ज रहा है कि इसके जरिए वाहन एक-दूसरे के साथ स्पीड, लोकेशन, दिशा और एक्सीलरेशन जैसी महत्वपूर्ण जानकारी रियल-टाइम में साझा करेंगे। उदाहरण के तौर पर देखे ततो यदि आगे चल रही कार अचानक इमरजेंसी ब्रेक लगाती है या कोई वाहन गलत दिशा से आ रहा है तो पीछे आने वाली कार को तुरंत अलर्ट मिल जाएगा। इससे चालक समय रहते प्रतिक्रिया दे सकेगा और दुर्घटना की आशंका काफी हद तक कम हो सकती है।
देखा जजा रहा था कि अब तक अधिकांश सुरक्षा फीचर्स केवल कार में लगे सेंसर और कैमरों पर निर्भर करते हैं। लेकिन V2V तकनीक इनकी सीमाओं से आगे जाकर काम करेगी। जिसमें यह Advanced Driver Assistance System (ADAS) के साथ मिलकर ऐसे खतरों की भी जानकारी दे सकेगी जिन्हें ड्राइवर या वाहन के सेंसर तुरंत नहीं देख पाते। यही वजह है कि इसे भविष्य की स्मार्ट मोबिलिटी का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
इस सिस्टम के संचालन के लिए सरकार ने 5.875 GHz से 5.925 GHz फ्रीक्वेंसी बैंड निर्धारित किया है जिसे दूरसंचार विभाग पहले ही लाइसेंस-फ्री घोषित कर चुका है। V2V सिस्टम C-V2X (Cellular Vehicle-to-Everything) तकनीक और ऑन-बोर्ड यूनिट के जरिए काम करेगा। वहीं AIS-230 मानक में साइबर सुरक्षा, रेडियो परफॉर्मेंस, GPS ट्रैकिंग और विभिन्न मौसमों में सिस्टम की विश्वसनीयता जैसी तकनीकी गाइडलाइंस शामिल हैं।