Car Fuel Share: पेट्रोल कारों की हिस्सेदारी में बड़ी गिरावट, EV और हाइब्रिड गाड़ियों की मांग बढ़ी

Car Fuel Share: भारत में कार खरीदने वालों की पसंद बदलती नजर आ रही है। जिसमें ग्राहक अब इलेक्ट्रिक कारों और हाइब्रिड गाड़ियों की तरह ज्यादा जा रहे है।
Car Fuel Share petrol car market share demand for EVs and hybrids rises
EV और Hybrid को क्यो लोगं पसंद कर रहे।Source. Pixabay
Published on: 
Updated on: 

India Fuel Preference: भारत में कार खरीदने वालों की पसंद धीरे-धीरे बदलती जा रही है। बता दें कि सितंबर 2026 में इलेक्ट्रिक कारों और हाइब्रिड गाड़ियों की बाजार हिस्सेदारी बढ़ी है जबकि पेट्रोल कारों का हिस्सा पिछले साल के मुकाबले कम हुआ है। देखा जा रहा है कि फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के आंकड़ों के मुताबिक इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी में सबसे ज्यादा 2.71 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं पेट्रोल कारों की हिस्सेदारी 5.91 प्रतिशत अंक नीचे आई। लेकिन कुल हिस्सेदारी के मामले में पेट्रोल कारें अब भी थोड़ी आगे हैं।

सितंबर में किस फ्यूल वाली कार की कितनी हिस्सेदारी रही?

FADA के आंकड़ों में बताया गया है सितंबर 2025 और सितंबर 2026 के बीच कारों के रजिस्ट्रेशन में फ्यूल के हिसाब से यह बदलाव हुआ:

देखा जा रहा है कि यहां हिस्सेदारी में बदलाव का मतलब कुल कार रजिस्ट्रेशन में किसी फ्यूल की भागीदारी बढ़ना या घटना है। इससे यह जरूरी नहीं कि उस फ्यूल वाली कारों की बिक्री की संख्या भी उतने ही अनुपात में कम हुई हो।

EV और हाइब्रिड कारों की हिस्सेदारी क्यों बढ़ रही है?

वहीं सितंबर 2026 में इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी 8.45% तक पहुंच गई जबकि हाइब्रिड कारों का हिस्सा 9.44% रहा। हाइब्रिड कारों में पेट्रोल इंजन के साथ इलेक्ट्रिक मोटर भी होती है जो ड्राइविंग के दौरान ईंधन की खपत कम करने में मदद कर सकती है। वहीं पूरी तरह इलेक्ट्रिक कारें बैटरी से चलती हैं। इस बदलाव के बीच कार कंपनियां अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से पेट्रोल, CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक मॉडल पेश कर रही हैं। इससे ग्राहकों को विकल्प मिल रहे हैं हालांकि खरीदने से पहले कीमत, रोजाना की दूरी और चार्जिंग की सुविधा जैसे पहलुओं पर विचार करना जरूरी है।

अगस्त में वैकल्पिक फ्यूल आगे थे, सितंबर में बदला रुझान

देखा गया है कि अगस्त 2026 में CNG/LPG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कारों की संयुक्त हिस्सेदारी 41.95% रही थी जो पेट्रोल की 40.85% हिस्सेदारी से ज्यादा थी। लेकिन सितंबर में पेट्रोल की हिस्सेदारी 41.27% पर पहुंच गई जबकि इन तीनों श्रेणियों का संयुक्त हिस्सा 41% रहा इसका मतलब है कि बाजार में बदलाव जारी है लेकिन पेट्रोल कारों की जगह वैकल्पिक फ्यूल वाली गाड़ियों ने पूरी तरह नहीं ली है। ऐसे में आने वाले महीनों में ग्राहकों की पसंद और नए मॉडल इस प्रतिस्पर्धा की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com