

Highlights:
तुला राशि में सूर्य का प्रवेश, जानें सोना-चांदी और अनाज में तेजी-मंदी के संकेत
20 अक्टूबर को दशहरा, दुर्गाष्टमी से महानवमी तक जानें व्रत-त्योहारों की पूरी लिस्ट
24 अक्टूबर को बुध होंगे वक्री, सूर्य-शुक्र-बुध के गोचर से बाजार में क्या होंगे बदलाव?
Grah Gochar 18 To 24 October 2026: ज्योतिषीय गणना के अनुसार 18 से 24 अक्टूबर 2026 तक का सप्ताह धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण रहेगा। इस दौरान सूर्य तुला राशि में प्रवेश करेंगे।
सप्ताह में शारदीय नवरात्रि का समापन, विजयादशमी और दशहरा जैसे प्रमुख पर्व मनाए जाएंगे। ग्रहों की स्थिति के आधार पर अनाज, सोना-चांदी, कपास और अन्य वस्तुओं के बाजार में उतार-चढ़ाव के संकेत बताए गए हैं।
इस सप्ताह सूर्य 18 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 34 मिनट पर कन्या राशि से तुला राशि में प्रवेश करेंगे। मंगल कर्क राशि में, बुध तुला राशि में, गुरु कर्क राशि में और शुक्र तुला राशि में वक्री अवस्था में रहेंगे। शनि मीन राशि में वक्री रहेंगे। राहु कुंभ राशि और केतु सिंह राशि में स्थित रहेंगे। वहीं, 24 अक्टूबर को रात 7 बजकर 26 मिनट से बुध वक्री होंगे। चंद्रमा इस सप्ताह मीन, मेष, वृषभ और मिथुन राशियों में संचरण करेगा।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार 18 अक्टूबर को तुला राशि में सूर्य का बुध और शुक्र के साथ राशि संबंध बनने से गेहूं, जौ, चना, अन्य अनाज, अफीम और सोने में तेज उछाल के संकेत बताए गए हैं। वहीं, चांदी, रूई, अलसी, सरसों, बिनौला और मूंगफली में मंदी की संभावना जताई गई है। नारियल, सुपारी, लाल चंदन और मजीठ में सामान्य तेजी के संकेत हैं।
24 अक्टूबर को स्वाती नक्षत्र में सूर्य और वक्री बुध के प्रभाव से सोना, चांदी, रूई, सूत, कपड़ा, गुड़, शक्कर, बिनौला, सुपारी, मिर्च, सरसों, अलसी, राई, हींग और जीरा आदि वस्तुओं में तेजी आने के संकेत बताए गए हैं।
ये बाजार संबंधी अनुमान ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। वास्तविक बाजार की चाल कई आर्थिक और व्यावसायिक कारकों पर निर्भर करती है।
रविवार, 18 अक्टूबर – श्री दुर्गाष्टमी व्रत, महाष्टमी व्रत और महानिशा पूजा।
सोमवार, 19 अक्टूबर – श्री दुर्गा नवमी व्रत, महानवमी और सौर कार्तिक मास का प्रारंभ।
मंगलवार, 20 अक्टूबर – देवी विसर्जन, सरस्वती विसर्जन, विजया दशमी, दशहरा, नीलकंठ दर्शन, शस्त्र पूजन, शमी पूजन और पट्टाभिषेक।
गुरुवार, 22 अक्टूबर – भरत मिलाप और पापांकुशा एकादशी व्रत।
शुक्रवार, 23 अक्टूबर – प्रदोष व्रत।
18 अक्टूबर को दुर्गाष्टमी और 19 अक्टूबर को महानवमी के साथ मां दुर्गा की आराधना का विशेष महत्व रहेगा। इसके बाद 20 अक्टूबर को विजयादशमी और दशहरा मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विजयादशमी बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस दिन शस्त्र पूजन, शमी पूजन और नीलकंठ दर्शन की परंपरा भी निभाई जाती है।
इस सप्ताह धार्मिक दृष्टि से दुर्गाष्टमी, महानवमी और विजयादशमी प्रमुख रहेंगे। पूजा-पाठ और पारंपरिक अनुष्ठानों के लिए श्रद्धालु अपनी स्थानीय पंचांग परंपरा के अनुसार शुभ समय देख सकते हैं। वहीं, बाजार में तेजी-मंदी के ज्योतिषीय संकेतों को निश्चित परिणाम न मानें और कारोबार या निवेश से जुड़े निर्णय वास्तविक परिस्थितियों तथा विश्वसनीय जानकारी के आधार पर लें।