क्यों मनाई जाती है कजरी तीज, जानें महत्व

Why Kajri Teej is celebrated, learn importance
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कजरी तीज का पर्व महिलाओं के लिए बहुत खास होता है. भाद्रपद मास में कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज मनाई जाती है. इस साल यह त्यौहार 6 अगस्त को मनाया जाएगा. कजरी तीज को कजली तीज, बूढ़ी तीज व सातुड़ी तीज भी कहा जाता है. यह रक्षाबंधन, माने श्रावण पूर्णिमा के तीसरे दिन आता है. कजरी तीज उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में मनाई जाती है. इस दिन शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना कर निर्जला व्रत रखती हैं. साथ ही भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं.

कजरी तीज का महत्व:
कजरी तीज का बहुत खास महत्व है. माना जाता है कि, इस दिन सुहागिन स्त्रियां सोलह श्रृंगार करके, निर्जला व्रत रखती हैं और भगवान शंकर व माता गौरी की पूजा करती हैं और उनसे सदा सौभाग्यवती रहने का वरदान मांगती हैं. कुंवारी कन्याएं भी मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए कजरी तीज का व्रत रखती हैं.

क्यों मनाई जाती है कजरी तीज?
मान्यता के अनुसार कजली मध्य भारत में स्थित एक घने जंगल का नाम था. जिसके आसपास का क्षेत्र राजा दादूरई का था. वहां के लोग अपनी जगह कजली के नाम पर गाना गाया करते थे. कुछ समय बाद राजा की मृत्यु हो गई. जिसके बाद उनकी पत्नी रानी नागमती ने खुद को सती प्रथा में अर्पित कर दिया. इस दुख में वहां के लोग कजली राग गाने लगे. यह गीत पति पत्नी के प्रेम का प्रतीक माना जाता है.

-मृणाल पाठक

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