ग्राम विकास का मॉडल बना मंगी (बु) गांव

कुछ करने की इच्छाशक्ति हो तो कुछ असंभव नहीं होता है इसका उदाहरण राजुरा तहसील के मंगी (बु) गांव में देखने को मिला है।
Mangi (Bu) village becomes the model of village development
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  • दूसरे ग्राम पंचायत के लिए प्रेरणादायी

राजुरा. कुछ करने की इच्छाशक्ति हो तो कुछ असंभव नहीं होता है इसका उदाहरण राजुरा तहसील के मंगी (बु) गांव में देखने को मिला है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मिलने वाली शासकीय निधि के अलावा जनसहयोग से गांव को धुआमुक्त, निर्मल ग्राम, शराबमुक्त कर गांव का कायाकल्प किया है। आज मंगी ग्राम विकास का माडल और अन्य ग्राम पंचायतों के लिए प्रेरणादायी बना है।

मंगी (बु) गुट ग्रापं में खैरगुडा, कुडमेथेगुडा, राजीगुंडा, मंगी (बु) गांव का समावेश है। ग्राम पंचायत ने विकास के बल पर स्मार्ट विलेज के रुप में 11 लाख रुपये का पुरस्कार प्राप्त किया है। जनसहयोग से गांव की अलग पहचान बनी है। गांव के मार्ग, साफ सफाई के साथ जनसहयोग से धुआमुक्त हो गया है। ग्रामीणों ने घर के पास शोषगड्ढे तैयार कर बहने वाले पानी की समस्या से छुटकारा पा लिया है। हर घर में शौचालय होने से गांव निर्मल हो गया है। सफाई की बदौलत ग्रापं को संत गाडगेबाबा स्वच्छता पुरस्कार मिला है। इसमें से 8 लाख के आरो प्लांट से ग्रामीणों को शुध्द पेयजल उपलब्ध हो रहा है। गांव के प्रवेश द्वार पर सुंदर और मनमोहक बगीचा तैयार किया है जिससे गांव सुंदर और हराभरा दिखाई देता है। आंगनवाडी का सुशोभीकरण किया गया है जिससे देखने वालों की नजर नहीं हटती है। ग्रामीण विकास के साथ आध्यात्मिक और सर्वधर्म समभाव का संदेश दे रहे है। ग्रापं ने 5 वर्षो से गांव के कायाकल्प और विकास पर जोर दिया है।

मंगी (बु) गांव के विकास में अंबुजा सीमेंट फाउंडेशन उपरवाही के कार्यक्रम अधिकारी श्रीकांत कुंभारे का बडा योगदान है। उन्होंने समय समय पर मार्गदर्शन और आर्थिक सहयोग किया है। इसके अलावा सरपंच रसिका पेंदोर, उपसरपंच वासुदेव चापले, शंकर तोडासे, ग्रामसेवक वंजारे, मुख्याध्यापक रत्नाकर भेंडे आदि मेहनत कर रहे है।