अंकिता पटेल
हर साल 5 अक्टूबर को दुनियाभर में World Teachers' Day मनाया जाता है, जिसे International Teachers' Day के नाम से भी जाना जाता है।
इस दिन की जड़ें 5 अक्टूबर 1966 से जुड़ी हैं, जब UNESCO और ILO ने पेरिस में एक खास अंतरसरकारी सम्मेलन में शिक्षकों की स्थिति से जुड़ी सिफारिश को अपनाया था।
1966 की इस सिफारिश ने पहली बार दुनियाभर के शिक्षकों को एक ऐसा दस्तावेज दिया, जिसमें उनकी जिम्मेदारियां और अधिकार, दोनों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया।
UNESCO ने 1994 में औपचारिक रूप से 5 अक्टूबर को World Teachers' Day घोषित किया, ताकि 1966 की इस ऐतिहासिक सिफारिश को हर साल याद किया जा सके।
5 अक्टूबर 1994 को ही दुनियाभर में पहली बार इस दिन को मनाया गया, और तब से यह परंपरा हर साल जारी है।
1997 में UNESCO ने उच्च शिक्षा में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए भी एक अलग सिफारिश जारी की, जिसका मकसद कॉलेज और यूनिवर्सिटी स्तर पर भी शिक्षकों के अधिकार सुनिश्चित करना था।
आज दुनिया के 100 से अधिक देशों में यह दिन मनाया जाता है, जो शिक्षकों के योगदान को सम्मान देने की एक वैश्विक परंपरा बन चुका है।
शिक्षकों की उपलब्धियों की सराहना करना, उनकी कार्यस्थितियों को बेहतर बनाना और भविष्य की पीढ़ियों के लिए शिक्षा से जुड़ी उनकी चिंताओं पर ध्यान केंद्रित करना, यही इस दिन का मूल मकसद है।
UNESCO का मानना है कि शिक्षा, संस्कृति और संवाद ही शांति की नींव रखते हैं, और शिक्षक इस प्रक्रिया की सबसे अहम कड़ी हैं, जो पीढ़ियों को गढ़ने का काम करते हैं।
अपने किसी पसंदीदा शिक्षक को धन्यवाद कहें, सोशल मीडिया पर #WorldTeachersDay के साथ उनकी तस्वीर और यादें साझा करें, और उनके योगदान को खुलकर सराहें।